उन्होंने कहा,
"ममता बनर्जी बंगाल की राजनीति में नमक हराम का ज्वलंत उदाहरण हैं। 2011 में कांग्रेस की कृपा से तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सरकार बनी। यदि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और दिग्गज नेता प्रणब मुखर्जी का समर्थन न होता, तो ममता बनर्जी कभी सत्ता में नहीं आ सकती थीं।" उन्होंने ममता बनर्जी पर कांग्रेस से मिले राजनीतिक समर्थन को ठुकराने और स्वार्थ की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा,
"नमक हराम का मतलब होता है कि जब तक स्वार्थ सिद्ध हो रहा हो, तब तक साथ रहो और जब स्वार्थ पूरा हो जाए, तो पलट जाओ। ममता बनर्जी की राजनीति इसी पर आधारित है।"
ममता बनर्जी पर "गठबंधन तोड़ने" और "विश्वासघात" का आरोप
यह पहली बार नहीं है जब अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी पर इस तरह का हमला बोला हो। इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख पर निशाना साधा था। उस समय उन्होंने कहा था कि ममता बनर्जी पर उन्हें भरोसा नहीं है क्योंकि वह कांग्रेस से गठबंधन तोड़कर भाग गई थीं।
उन्होंने आरोप लगाया,
"ममता बनर्जी ने 2011 में कांग्रेस के समर्थन से सत्ता हासिल की थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने कांग्रेस को नजरअंदाज कर दिया। वह गठबंधन छोड़कर भाग गईं और अब जब कांग्रेस सत्ता में आने की ओर बढ़ रही है, तो वह फिर से नजदीक आने की कोशिश कर रही हैं। ममता बनर्जी अवसरवादी राजनीति कर रही हैं।"
अधीर रंजन चौधरी इससे पहले भी ममता बनर्जी पर गठबंधन तोड़ने, सत्ता के लालच में कांग्रेस को धोखा देने और राजनीतिक अवसरवादिता दिखाने के आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने कई बार कहा कि ममता बनर्जी पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार कांग्रेस की ही देन थी, लेकिन सत्ता हासिल करने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस को किनारे कर दिया।
राजनीतिक हमलों के बीच कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस का रिश्ता
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि कई मौकों पर विपक्षी एकता के नाम पर दोनों दलों ने एक साथ आने की कोशिश की, लेकिन अधीर रंजन चौधरी और ममता बनर्जी के बीच कटुता बनी रही।
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी ममता बनर्जी ने संकेत दिए थे कि वह कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती हैं। लेकिन अधीर रंजन चौधरी जैसे कांग्रेस नेताओं ने इस पर सख्त ऐतराज जताया और ममता बनर्जी पर गठबंधन तोड़ने का आरोप लगाया।
Read This Also:- पश्चिमी बंगाल के विधानसभा चुनाव पर AIMIM की नज़र, पंचायत चुनाव में मिले वोटों से जागा पार्टी का आत्मविश्वास
Read This Also:- पश्चिमी बंगाल के विधानसभा चुनाव पर AIMIM की नज़र, पंचायत चुनाव में मिले वोटों से जागा पार्टी का आत्मविश्वास





