आखिर बीजेपी सांसद ने ऐसा क्या कह दिया, जिसने इतना बवाल मचा दिया?
प्रदीप पुरोहित ने अपने संबोधन में एक संत से हुई मुलाकात का विस्तृत जिक्र किया, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें यह रहस्योद्घाटन किया कि नरेंद्र मोदी का पूर्व जन्म छत्रपति शिवाजी महाराज के रूप में हुआ था। उन्होंने कहा, "मैं जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता हूं, वहां एक प्रसिद्ध गंधमर्दन पहाड़ी क्षेत्र स्थित है। वहां एक सम्मानित संत गिरिजा बाबा निवास करते हैं। एक दिन उनसे अनौपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने हमें यह आश्चर्यजनक बात बताई कि वर्तमान में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पिछले जन्म में महान छत्रपति शिवाजी महाराज थे। यही कारण है कि आज वे अथक परिश्रम और दृढ़ संकल्प के साथ भारत को विश्व के सबसे शक्तिशाली और सम्मानित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिए कार्य कर रहे हैं।" पुरोहित ने इस दावे को एक गहरे आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंध के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया, लेकिन उनके इस बयान ने तत्काल विवाद को हवा दे दी। इस बयान के बाद सोशल मीडिया, खासकर एक्स प्लेटफॉर्म, प्रतिक्रियाओं से भर गया।
कई यूजर्स ने इसे छत्रपति शिवाजी महाराज की महानता और सम्मान के साथ खिलवाड़ करार दिया। विपक्षी दलों ने इस बयान को अपने हाथों में ले लिया और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे छत्रपति शिवाजी महाराज की अनमोल विरासत को राजनीति के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश बताया। मुंबई की कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड ने इस बयान का एक वीडियो साझा करते हुए मराठी में लिखा, "अखंड भारत के पूज्य और आराध्य देव छत्रपति शिवाजी महाराज का बार-बार अपमान करने और महाराष्ट्र सहित दुनिया भर के शिव प्रेमियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए बीजेपी नेतृत्व एक सुनियोजित और शर्मनाक साजिश रच रहा है। इन लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिष्ठित और सम्मानजनक टोपी को नरेंद्र मोदी के सिर पर रखकर उनके गौरव का घोर अपमान किया है। और अब इस बीजेपी सांसद का यह बेहद आपत्तिजनक और घृणित बयान सुनें... हम शिवाजी महाराज के बार-बार अपमान के लिए बीजेपी की कड़े शब्दों में सार्वजनिक निंदा करते हैं। बीजेपी पूरी तरह शिव-विरोधी है। हम शिवाजी महाराज का यह अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। नरेंद्र मोदी को तुरंत पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए और इस सांसद को तत्काल प्रभाव से निलंबित करना चाहिए।"
इसी तरह, शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, "बीजेपी के इन बेशर्म और चापलूस नेताओं पर तुरंत नियंत्रण करने की सख्त जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से करना किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।"
ऐतिहासिक संदर्भ और विवाद की जड़
छत्रपति शिवाजी महाराज 17वीं शताब्दी के मराठा शासक थे, जिन्होंने मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ स्वराज की मजबूत नींव रखी थी। उनकी अदम्य वीरता, बेजोड़ युद्ध रणनीति और कुशल प्रशासनिक क्षमता ने उन्हें भारतीय इतिहास में एक अमर नायक का दर्जा दिलाया। खासकर महाराष्ट्र में, वे एक सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक गौरव के प्रतीक माने जाते हैं। ऐसे में, उनके नाम और व्यक्तित्व को किसी समकालीन नेता से जोड़ना स्वाभाविक रूप से अत्यंत संवेदनशील और विवाद उत्पन्न करने वाला मुद्दा बन जाता है। अभी तक बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
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