इसके अगले ही दिन उन्होंने कुश्ती से संन्यास लेने की घोषणा की थी।
खेल से अलग, उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और सितंबर 2024 में कांग्रेस पार्टी से जुड़ गईं। इसके बाद उन्होंने जुलाना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और छह हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की। जनता ने उन्हें न केवल एक खिलाड़ी के रूप में बल्कि एक जनसेवक के रूप में भी स्वीकार किया।
पेरिस ओलंपिक के दौरान उनके प्रदर्शन को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की थी कि विनेश को रजत पदक विजेता के समान सम्मान और पुरस्कार दिया जाएगा। इस बयान ने राज्य भर में एक सकारात्मक संदेश फैलाया था, लेकिन आठ महीने बीतने के बाद भी इस घोषणा को अमल में नहीं लाया गया। इस देरी को लेकर विनेश ने विधानसभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि जब वह पेरिस में थीं, तब मुख्यमंत्री ने उन्हें बेटी कहकर सम्मान देने का वादा किया था, लेकिन अब तक उसे पूरा नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री की ओर से दोबारा आश्वासन दिए जाने के बाद विनेश को राज्य की खेल नीति के अनुसार तीन विकल्प दिए गए, जिनमें से उन्होंने नकद पुरस्कार को चुना। हालांकि यह मामला केवल पुरस्कार राशि का नहीं, बल्कि उस भरोसे और सम्मान का है जिसकी अपेक्षा एक खिलाड़ी अपने देश और सरकार से करता है।
Read This Also:- पूर्व पहलवान और सांसद विनेश फोगाट ने मांगा नकद इनाम के साथ प्लॉट, खेल विभाग उलझन में
Read This Also:- पूर्व पहलवान और सांसद विनेश फोगाट ने मांगा नकद इनाम के साथ प्लॉट, खेल विभाग उलझन में





