सपा प्रमुख अखिलेश यादव शीघ्र ही मिल्कीपुर का दौरा करेंगे। सपा दो कारणों से इस सीट को जीतना चाहती है - एक तो प्रतिष्ठा का सवाल है, दूसरा यहां से सपा ने पहले ही अजित प्रसाद को प्रत्याशी घोषित कर रखा है, जो सपा सांसद अवधेश प्रसाद के पुत्र हैं। फैजाबाद से सांसद बनने से पूर्व अवधेश प्रसाद इसी सीट के विधायक थे। इसलिए न सिर्फ सपा, बल्कि स्वयं अवधेश प्रसाद के लिए अपने पुत्र की जीत महत्वपूर्ण है। अखिलेश ने फैजाबाद लोकसभा सीट पर पार्टी की जीत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया और अवधेश प्रसाद को पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाया। वे लोकसभा में अवधेश प्रसाद को अपने साथ बैठाकर विशेष संदेश देते हैं।
ब्राह्मण और दलित बहुल मिल्कीपुर सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच होगा। दोनों दल वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश करेंगे, जिससे दलित और ब्राह्मण वोट एकजुट होकर किसी एक ओर झुक सकते हैं। इस उपचुनाव में कांग्रेस सपा के साथ है, जबकि बसपा ने चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है। बसपा के दलित मतदाताओं का रुख क्या होगा, यह एक बड़ा सवाल है और दोनों दलों की नजर इस पर टिकी है। सपा अभी भाजपा के प्रत्याशी की घोषणा का इंतजार कर रही है।
अयोध्या में सपा के दो दिग्गज नेताओं के बीच की खाई को पाटने के गंभीर प्रयास तेज हो गए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मिल्कीपुर उपचुनाव से पहले दोनों महारथियों को एक मंच पर लाने की जोरदार कोशिशें चल रही हैं। इस बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब रविवार को सांसद अवधेश प्रसाद और पूर्व मंत्री आनंदसेन एक होटल में गुप्त मुलाकात कर मतभेदों की दीवार को गिराते नजर आए। सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। विशेष रूप से, मिल्कीपुर की राजनीति में दबदबा रखने वाले सेन परिवार को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर अवधेश प्रसाद ने विशेष जोर दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह मुलाकात आने वाले समय में कई बड़े राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है।





