इसके बावजूद, विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने यह तय किया है कि सूरी की गतिविधियों के कारण उन्हें डिपोर्ट किया जा सकता है।
बदर खान सूरी कौन हैं?
बदर खान सूरी वर्तमान में वॉशिंगटन स्थित जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं और वे अमेरिका में स्टूडेंट वीजा पर हैं। वे जॉर्ज टाउन के अलवलीद बिन तलाल सेंटर फॉर मुस्लिम-क्रिश्चियन अंडरस्टेंडिंग से पीएचडी कर रहे हैं। सूरी की पत्नी मफीजी सालेह गाजा से हैं और उन्हें अमेरिकी नागरिकता प्राप्त है। यह मामला और भी गंभीर हो गया है क्योंकि विश्वविद्यालय ने सूरी के खिलाफ किसी तरह की कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी की जानकारी होने से इनकार किया है और कहा है कि उन्हें नहीं पता कि सूरी किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल हैं।
सूरी को सोमवार रात वर्जीनिया के रोजलिन से उनके घर से हिरासत में लिया गया था। उनके वकील ने रॉयटर्स से बातचीत में बताया कि वे इमीग्रेशन कोर्ट से तारीख मिलने का इंतजार कर रहे हैं। वकील ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अगर संघर्ष के समाधान पर ध्यान केंद्रित करने वाले एक स्कॉलर को सरकार विदेश नीति के लिए बुरा मानती है, तो शायद समस्या सरकार में है, न कि स्कॉलर में।" इस मामले को लेकर सूरी और उनके परिवार का कहना है कि वे पूरी तरह से निर्दोष हैं और यह आरोप पूरी तरह से आधारहीन हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब ट्रंप सरकार ने पहले भी ऐसे छात्रों के खिलाफ कदम उठाए हैं, जो फिलिस्तीन समर्थक रैलियों में शामिल हुए थे। हाल ही में, ट्रंप सरकार ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी के छात्र महमूद खलील को गिरफ्तार करने और डिपोर्ट करने की मांग की थी, क्योंकि वह एक फिलिस्तीन समर्थन रैली में शामिल हुए थे। ट्रंप का आरोप है कि खलील हमास का समर्थन कर रहे थे। हालांकि, खलील ने इन आरोपों का खंडन किया और उनकी लीगल टीम ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी है। यह स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन फिलिस्तीन समर्थक गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है, और भारतीय छात्र बदर खान सूरी के मामले ने इस नीति को और मजबूत किया है।
हालांकि, अमेरिकी सरकार ने अभी तक इस मामले में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे सूरी की गतिविधियों की पूरी जांच करेंगे। सूरी के खिलाफ उठाए गए कदमों ने यह सवाल उठाया है कि क्या अमेरिकी सरकार विदेश नीति से जुड़े मामलों में नागरिकों और छात्रों के विचारों को दबाने की कोशिश कर रही है। यह मामला उन मामलों की एक कड़ी प्रतीत होता है, जहां सरकारें अपनी विदेश नीति के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दमन करने के लिए कानूनी और राजनीतिक दबाव का इस्तेमाल करती हैं।
अमेरिका में छात्रों और शोधकर्ताओं की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं, खासकर जब ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें किसी छात्र को अपनी व्यक्तिगत विचारधारा या शोध के कारण कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। यह सवाल भी उठता है कि क्या सूरी जैसे लोग अपनी राय रखने या दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने के लिए सुरक्षित महसूस कर सकते हैं, या फिर उन पर राजनीतिक दबाव डालकर उनके अधिकारों का उल्लंघन किया जाएगा।
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