सुप्रीम कोर्ट ने गठित की आंतरिक जांच समिति
नकदी बरामदगी का मुद्दा देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय आंतरिक समिति का गठन किया है। साथ ही, जस्टिस यशवंत वर्मा को अगले आदेश तक सभी न्यायिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है।
सोमवार को संसद के दोनों सदनों में यह मुद्दा उठा था, जिस पर राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और सदन के नेता जेपी नड्डा ने उपराष्ट्रपति धनखड़ से मुलाकात की। इसके बाद सभापति धनखड़ ने कहा,
"न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन इस प्रकार की घटनाओं से जनता का भरोसा डगमगाता है।"
राज्यसभा में चर्चा के दौरान उपराष्ट्रपति धनखड़ ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक नियुक्तियों के लिए बनाए गए इस कानून को रद्द नहीं किया होता, तो स्थिति शायद अलग होती।
उन्होंने यह भी कहा,
"संविधान के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी को भी संविधान संशोधन को अस्वीकार करने की अनुमति देता हो। संसद द्वारा पारित कानूनों की न्यायिक समीक्षा हो सकती है, लेकिन उनके संशोधन को चुनौती देना उचित नहीं है।"
खरगे ने की निष्पक्ष जांच की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा,
"न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि ऐसा होते हुए दिखना भी चाहिए। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि सोमवार को जब उन्होंने और जेपी नड्डा ने उपराष्ट्रपति धनखड़ से मुलाकात की, तो उन्हें लगा कि इस मामले में कोई भी अगला कदम उठाने से पहले सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना जरूरी है। इसी के मद्देनजर, मंगलवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है।
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