सपा सदस्यों ने "गुंडागर्दी नहीं चलेगी" और "पाठक तेरी तानाशाही नहीं चलेगी" के नारे लगाए। स्वास्थ्य मंत्री की बर्खास्तगी की मांग की गई। माता प्रसाद ने उप मुख्यमंत्री के आक्रामक रवैये पर प्रश्न उठाया। सुरेश खन्ना ने इसे असंसदीय बताते हुए पीठासीन अधिकारी से हस्तक्षेप का आग्रह किया। विधानसभा अध्यक्ष ने अतुल प्रधान को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया। इसके बावजूद विपक्ष का वेल में हंगामा और नारेबाजी जारी रही।
इससे पहले, मंगलवार को सपा सदस्यों ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के माध्यम से बिजली विभाग के मुद्दों पर चर्चा की मांग रखी। सपा सदस्य ओम प्रकाश सिंह, नफीस अहमद, आरके वर्मा और कांग्रेस की आराधना मिश्रा ने बिजली के निजीकरण का विरोध किया। उन्होंने कहा कि विभाग बिजली आपूर्ति में विफल हो रहा है, घाटा बढ़ता जा रहा है और नए बिजलीघरों की स्थापना नहीं हो रही है।
सपा के वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश सिंह ने बिजली मंत्री पर व्यंग्य करते हुए कहा कि वे गुजरात में आईएएस अधिकारी थे। उन्होंने कहा, "पढ़ने के लिए गुजरात गए और अब हमें परेशान करने आए हैं।" विधान परिषद सदस्य ने तंज कसा, "चुनाव लड़कर आएंगे तो समझ में आएगा, ये ऊपर से आए हैं। नेता सदन (योगी आदित्यनाथ) से कुछ सीखिए, आपकी वकालत कहीं और से है।"
पल्लवी पटेल सदन में नहीं उठा पाईं अपना मुद्दा
मंगलवार शाम को सपा विधायक पल्लवी पटेल ने नियम 56 के तहत भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाना चाहा, लेकिन अध्यक्ष सतीश महाना ने बताया कि यह नियम 56 के अंतर्गत नहीं आता। पटेल ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार रात उनके धरने के दौरान सदन में बात रखने का आश्वासन दिया था। खन्ना ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल नियमानुसार बात सुने जाने की बात कही थी। अध्यक्ष ने सदस्या के प्रति सम्मान जताते हुए दोहराया कि उनका मुद्दा इस नियम में नहीं आता। इसके बाद पटेल ने सदन के बाहर मीडिया से बातचीत की।





