मेक्सिको को होगा सबसे बड़ा नुकसान
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या इस फैसले को बदला जा सकता है, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "यह स्थायी है, लेकिन अगर आप अमेरिका में अपनी कार बनाते हैं, तो कोई टैरिफ नहीं लगेगा।"
गौरतलब है कि मेक्सिको अमेरिका को कारों का सबसे बड़ा विदेशी आपूर्तिकर्ता है। उसके बाद दक्षिण कोरिया, जापान, कनाडा और जर्मनी का स्थान आता है। इस फैसले से सबसे ज्यादा असर मेक्सिको पर पड़ने वाला है, क्योंकि वह अमेरिका को सबसे अधिक कारें निर्यात करता है।
फरवरी में ट्रंप ने पहली बार इम्पोर्टेड वाहनों पर 25% टैरिफ लगाने का संकेत दिया था, लेकिन इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई थी। अब यह टैरिफ 2 अप्रैल से लागू होगा। इस दिन को ट्रंप ने ‘लिबरेशन डे’ नाम दिया है, जिस दिन वे कई अन्य रेसिप्रोकल टैरिफ (पारस्परिक शुल्क) भी लागू करने की योजना बना रहे हैं।
अमेरिकी प्रशासन का क्या कहना है?
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अमेरिकी व्यापारिक साझेदार अमेरिका के उत्पादों पर अनुचित तरीके से टैक्स लगाते हैं। लंबे समय से ट्रंप का कहना रहा है कि अमेरिका को उसके व्यापारिक साझेदारों द्वारा धोखा दिया जा रहा है, और टैरिफ लगाना ही व्यापार संतुलन बनाने का सबसे अच्छा तरीका है।
हालांकि, इस फैसले को लेकर निवेशकों, कॉर्पोरेट अमेरिका और उपभोक्ताओं के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी ऑटोमोबाइल बाजार पर व्यापक असर डाल सकता है और इससे वाहनों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
इस फैसले को लेकर एक और चर्चा जोरों पर है—क्या टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने ट्रंप को यह कदम उठाने के लिए प्रभावित किया?
हालांकि, ट्रंप ने इस अटकल को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, "एलन मस्क ने मुझसे कभी कोई एहसान नहीं मांगा है और न ही उन्होंने ऑटो टैरिफ पर कोई सलाह दी है।"
हालांकि, यह सच है कि ट्रंप ने इस नीति को लागू करने से पहले प्रमुख ऑटो निर्माताओं से इस मुद्दे पर चर्चा की थी। यह भी माना जा रहा है कि इस टैरिफ से अमेरिकी कंपनी टेस्ला को बड़ा फायदा हो सकता है, क्योंकि इससे अमेरिकी बाजार में विदेशी कारों की कीमत बढ़ जाएगी, जिससे टेस्ला जैसी घरेलू कंपनियों की बिक्री में इजाफा हो सकता है।
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