सम्मेलन में व्यापारियों ने बॉलीवुड सहित भारतीय फिल्म उद्योग से अनुरोध किया कि तुर्की और अज़रबैजान में किसी भी प्रकार की फिल्म की शूटिंग न की जाए। यदि ऐसा होता है, तो ऐसी फिल्मों का व्यापारिक समुदाय और आम नागरिक स्तर पर बहिष्कार किया जाएगा।
साथ ही यह भी तय किया गया कि कोई भी कॉरपोरेट हाउस अपने प्रोडक्ट्स की प्रमोशन शूटिंग इन देशों में नहीं कराएगा।
CAIT के महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए तुर्की और अज़रबैजान के रुख को "भारत की उदार सहायता और सद्भावना का घोर अपमान" बताया।
उन्होंने कहा, “तुर्की और अज़रबैजान, जिन्होंने संकट के समय भारत से कूटनीतिक और मानवीय सहायता प्राप्त की थी, अब पाकिस्तान के समर्थन में खड़े होकर भारत की संप्रभुता और 140 करोड़ नागरिकों की भावनाओं को ठेस पहुँचा रहे हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है।”
यह सामूहिक फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब भारत हाल ही में पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवादी हमलों का सामना कर रहा है। तुर्की और अज़रबैजान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत विरोधी बयान दिए और पाकिस्तान के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया।
सम्मेलन में यह भावना ज़ोरदार रूप से व्यक्त की गई कि जो देश भारत के खिलाफ खड़े होंगे, उनके साथ भारत के कारोबारी भी खड़े नहीं होंगे। यह निर्णय केवल आर्थिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और आत्मसम्मान का भी प्रतीक है।





