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फर्जी प्रमाणपत्रों पर कसा शिकंजा, दिल्ली में EWS सर्टिफिकेट जारी करने पर पाबंदी

सिविल लाइंस स्थित मुख्यालय से उपायुक्त (मुख्यालय) संजीव मित्तल द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जांच पूरी होने तक कोई नया ईडब्लूएस प्रमाणपत्र जारी नहीं |

फर्जी प्रमाणपत्रों पर कसा शिकंजा, दिल्ली में EWS सर्टिफिकेट जारी करने पर पाबंदी
फोटो: फर्जी प्रमाणपत्रों पर कसा शिकंजा, दिल्ली में EWS सर्टिफिकेट जारी करने पर पाबंदी
दिल्ली सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए जारी किए जाने वाले प्रमाणपत्रों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का फैसला किया है। यह प्रमाणपत्र शैक्षणिक संस्थानों और नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण के लिए जरूरी होता है। सरकार का कहना है कि बड़ी संख्या में अपात्र लोगों को ईडब्लूएस प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं, जिसकी जांच की जाएगी। इस संबंध में राजस्व विभाग की ओर से सभी जिला अधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं। सिविल लाइंस स्थित मुख्यालय से उपायुक्त (मुख्यालय) संजीव मित्तल द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जांच पूरी होने तक कोई नया ईडब्लूएस प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा।

बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाणपत्र जारी होने की आशंका


राजस्व विभाग को आशंका है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को ईडब्लूएस प्रमाणपत्र दिए गए हैं, जो इस योजना के वास्तविक लाभार्थी नहीं हैं। ऐसे में सरकार अब तक जारी किए गए सभी प्रमाणपत्रों की गहन जांच करवाएगी। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह रोक कब तक प्रभावी रहेगी या जांच कितने समय में पूरी होगी। ईडब्लूएस प्रमाणपत्र उन लोगों को जारी किया जाता है, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 5 लाख रुपये से कम होती है। इस आय में कृषि, व्यापार और वेतन समेत सभी स्रोतों से होने वाली आमदनी शामिल होती है।

यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों की घोषणा और विश्वविद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इससे शिक्षा और रोजगार के लिए ईडब्लूएस आरक्षण का लाभ उठाने वाले छात्रों और युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली के निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटें ईडब्लूएस वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित हैं, जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय में भी इस वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण मिलता है।

इससे पहले 7 अप्रैल को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में राजस्व विभाग को ईडब्लूएस प्रमाणपत्रों में अनियमितताओं की जांच के निर्देश दिए गए थे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी जिला अधिकारियों को 15 दिन के भीतर अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी सौंपने को कहा गया है।