सोमवार को शशि थरूर ने एक ट्वीट किया था जिसमें केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. सुधाकरण एक ही मंच पर थे। इस तस्वीर पर उन्होंने अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह तस्वीर राज्य के आर्थिक विकास के लिए एक बहुत अच्छी और जरूरी शुरुआत है। उनका यह बयान राज्य के आर्थिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास था, लेकिन इसे लेकर कुछ अटकलें भी उठने लगीं। कुछ लोग मानते हैं कि थरूर राज्य की सत्ताधारी पार्टी, सीपीएम में शामिल हो सकते हैं, जबकि कुछ भाजपा से जुड़ने की संभावना पर भी चर्चा कर रहे हैं।
शशि थरूर ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे की भी सराहना की थी, जो कांग्रेस के अन्य नेताओं, खासकर राहुल गांधी और जयराम रमेश के रुख से बिलकुल अलग था। दोनों नेताओं ने पीएम मोदी के अमेरिका दौरे को भारतीय हितों के खिलाफ बताया था, जबकि थरूर ने इसे सकारात्मक तरीके से देखा। उनका कहना था कि पार्टी के हितों से ऊपर उठकर देश के हित में काम किया जा सकता है, और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
अब शशि थरूर ने जो सेल्फी साझा की है, उसमें केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के वाणिज्य मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स भी दिखाई दे रहे हैं। थरूर ने लिखा कि यह तस्वीर भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा के बाद ली गई थी, जो दोनों देशों के बीच अच्छे व्यापारिक संबंधों के संकेत के रूप में देखी जा रही है।
थरूर ने आगे यह भी कहा कि इस दौरान फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर चर्चा की गई, जो कई सालों से अटका हुआ था। इससे यह संकेत मिलता है कि थरूर के लिए विकास और व्यापारिक संबंध महत्वपूर्ण हैं, और वह इस मुद्दे पर अन्य राजनीतिक दलों के साथ सहयोग के लिए तैयार हो सकते हैं।
हालांकि, शशि थरूर के इस रुख को लेकर कांग्रेस के केरल यूनिट में हलचल मच गई है। पार्टी के स्थानीय मुखपत्र 'वीक्षणम दैनिक' ने शशि थरूर की कड़ी आलोचना करते हुए लिखा कि उनका यह रुख आपत्तिजनक है। लेख में कहा गया कि जब कांग्रेस पार्टी राज्य में एलडीएफ सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रही है, तो ऐसे में पार्टी के अंदर से ऐसी कमजोर करने वाली बातें आना खतरनाक हो सकती हैं। यह कांग्रेस पार्टी के अंदर एक स्पष्ट विभाजन का संकेत हो सकता है, जहां थरूर जैसे नेता अपनी सोच में कुछ अलग नजर आते हैं।
यह भी देखा जा रहा है कि शशि थरूर का यह रुख पार्टी में उनकी स्थिति को लेकर कुछ और जटिल कर सकता है। कई कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वह कांग्रेस से बाहर निकलकर राज्य की सत्ताधारी पार्टी सीपीएम या भाजपा के साथ जा सकते हैं, या फिर उनका रुख सिर्फ पार्टी के अंदर की राजनीति को लेकर है। इससे कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के लिए भी यह सवाल उठता है कि क्या थरूर पार्टी के अंदर अपनी स्थिति को लेकर असंतुष्ट हैं, और क्या पार्टी के लिए उनका समर्थन अब कमजोर हो सकता है।
कुल मिलाकर, शशि थरूर के हालिया ट्वीट और बयान से कांग्रेस में सियासी हलचल बढ़ी हुई है, और यह देखने वाली बात होगी कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस स्थिति को कैसे संभालता है।
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