स्पीकर की टिप्पणी पर कांग्रेस का विरोध
शुक्रवार को जब भारतीय बंदरगाह विधेयक, 2025 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी बोलने के लिए खड़े हुए, तो स्पीकर ने उनसे कहा, "आपका माइक चालू हो गया न? इनको बताओ न, माइक कैसे चालू होता है!" यह टिप्पणी कांग्रेस सांसदों को नागवार गुजरी और उन्होंने इसका विरोध किया। इस पर मनीष तिवारी ने भी हैरानी जताते हुए कहा, "अध्यक्ष महोदय, आप ही बताइए माइक कैसे चालू होता है?"
स्पीकर ने इसके जवाब में कहा, "माइक तभी चालू होगा, जब माननीय अध्यक्ष अनुमति देगा। बिना अध्यक्ष की अनुमति के माइक चालू नहीं हो सकता।" कांग्रेस सांसदों ने इस टिप्पणी को लेकर जोरदार विरोध जताया और खड़े होकर नाराजगी जाहिर की।
यह पहली बार नहीं है जब माइक बंद होने का विवाद उठा है। इससे पहले भी विपक्ष ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी। उस समय ओम बिरला ने स्पष्ट किया था कि "माइक का नियंत्रण चेयर के आदेश के अनुसार होता है, न कि चेयर पर बैठे व्यक्ति के हाथ में।" जब कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और बेनी बेहनन ने विधेयक पेश किए जाने पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने से इनकार कर दिया, तो स्पीकर ने सीपीआई-एम के के. राधाकृष्णन और टीएमसी के सौगत रॉय को बोलने का मौका दिया।
कांग्रेस सांसदों ने अपना विरोध जारी रखा, लेकिन एनसीपी, डीएमके, सपा और टीएमसी के सांसदों ने उनका साथ नहीं दिया।
हालांकि, गुरुवार को जब विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर स्पीकर को पत्र लिखा था, तब कांग्रेस के अलावा तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, केरल कांग्रेस, आरजेडी, आईयूएमएल, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और एमडीएमके जैसे दलों ने भी इस विरोध में अपनी सहमति जताई थी।
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