राधा वर्मा, जो 60 साल के हैं, ने बताया कि उनके घर पर भी 'मकान बिकाऊ है' का बोर्ड लगा हुआ है और वह अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहते हैं,
"मुझे याद है जब यहां दंगे भड़क गए थे। उस समय मेरी बहू गर्भवती थी और हम सभी डरे हुए थे। यह डर किसी को भी नहीं झेलना चाहिए। मस्जिद का विस्तार, भले ही वह एक छोटी सी बात हो, लेकिन इस इलाके में तनाव बहुत तेजी से बढ़ सकता है। यहां के माहौल में हमें लगता है कि हमें अपना घर बेचकर जल्द से जल्द यहां से चले जाना चाहिए।"
पंडित शंकर, जो इस इलाके में सालों से रह रहे हैं, ने भी अपनी आशंका जताई। उन्होंने कहा, "हम यहां वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन अब हम कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहते। यह विवाद धीरे-धीरे बढ़ सकता है और हमें सुरक्षित स्थान पर जाना ज्यादा उचित लगेगा।" सुशीला, जो 40 साल की हैं, ने कहा, "ये गलियां पहले से ही बहुत संकरी हैं और अब मस्जिद के विस्तार के बाद विवाद और बढ़ सकता है। यह और भी जटिल हो सकता है, और हम डरते हैं कि इस तनाव के बीच स्थिति बेकाबू हो सकती है।"
वहीं, मुस्लिम बहुल लेन नंबर 13 के निवासी मस्जिद के विस्तार का समर्थन करते हुए इसे आवश्यक बताते हैं।
साहिल, जो इस इलाके के निवासी हैं, ने कहा, "हमने पास की ज़मीन खरीदने के लिए पैसे जमा किए हैं क्योंकि मस्जिद हमारे लिए अब पर्याप्त बड़ी नहीं है। बहुत से लोग सड़कों पर नमाज पढ़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इसके अलावा, कुछ अफवाहें चल रही हैं कि एक नया एंट्री गेट बनेगा, लेकिन यह बिल्कुल गलत है। हम उसी गेट का इस्तेमाल करेंगे जो पहले से मौजूद है।" उनका कहना था कि मस्जिद का विस्तार केवल उन लोगों के लिए है जिन्हें सही जगह पर नमाज पढ़ने की जरूरत है।
पुलिस इलाके में स्थिति को लेकर पूरी तरह से सतर्क है और शांति बनाए रखने की कोशिश कर रही है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, "मंगलवार सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक बैरिकेड्स लगाए गए थे और पुलिस ने कुछ समय के लिए गली को बंद कर दिया था ताकि कोई अनहोनी न हो। स्थिति के शांत होते ही पुलिस ने बैरिकेड्स हटा दिए।
फिलहाल इलाके में शांति बनी हुई है, लेकिन कुछ लोग इस स्थिति को जानबूझकर बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।"
नगर निगम ने भी इस मामले में अपनी भूमिका निभाते हुए साइट पर काम रोकने का नोटिस चिपका दिया है, जिससे विवाद और न बढ़ सके। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अब स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और हर संभव प्रयास कर रही हैं कि इलाके में शांति बनी रहे। इसके बावजूद, यह मामला स्थानीय समुदायों के बीच असहमति और तनाव का कारण बन चुका है, जिसे सुलझाने के लिए स्थानीय नेताओं और अधिकारियों को मिलकर कदम उठाने की जरूरत है।
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