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Telangana Tunnel Collapse: ‘अब भी उम्मीद है, फोन बजेगा...’ तीन दिन से परिजनों की बेचैनी जारी

शनिवार सुबह सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने के बाद से भारतीय सेना, नौसेना, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं, लेकिन अभी तक कोई |

Telangana Tunnel Collapse: ‘अब भी उम्मीद है, फोन बजेगा...’ तीन दिन से परिजनों की बेचैनी जारी
फोटो: Telangana Tunnel Collapse,
तेलंगाना के नगरकुरनूल जिले में श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) परियोजना की सुरंग में फंसे आठ मजदूरों के बचने की उम्मीदें अब क्षीण होती जा रही हैं। शनिवार सुबह सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने के बाद से भारतीय सेना, नौसेना, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिल सकी है। इस बीच, 2023 में उत्तराखंड की ‘सिल्कयारा बेंड-बरकोट’ सुरंग में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित निकालने वाले ‘रैट माइनर्स’ की टीम भी इस मिशन में शामिल हो गई है, जिससे उम्मीदें फिर जगी हैं।

आठ मजदूरों की पहचान, परिवारों में चिंता और प्रार्थना


सुरंग के 13.5 किलोमीटर अंदर फंसे मजदूरों की पहचान उत्तर प्रदेश के मनोज कुमार और श्रीनिवास, झारखंड के संदीप साहू, जगता जेस, संतोष साहू और अनुज साहू, जम्मू-कश्मीर के सनी सिंह और पंजाब के गुरप्रीत सिंह के रूप में हुई है। दुर्घटना के बाद से इनसे कोई संपर्क नहीं हो सका है, जिससे परिजनों की बेचैनी बढ़ गई है। पंजाब के तरनतारन जिले के चीमा कलां गांव में गुरप्रीत सिंह की मां दर्शन कौर और पत्नी राजविंदर कौर का हाल बेहाल है। राजविंदर ने बताया कि उनके पति पिछले 20 वर्षों से तेलंगाना में मशीन ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे थे और कुछ दिन पहले ही घर से वापस लौटे थे। उन्होंने आखिरी बार शनिवार को गुरप्रीत से बात की थी, जब वे काम पर जा रहे थे।

उन्होंने कहा, "हर सुबह वह वीडियो कॉल कर हमें और बच्चों को जगाते थे। लेकिन शनिवार से कोई कॉल नहीं आई है। हमारा दिल अब भी किसी चमत्कार की उम्मीद कर रहा है।" झारखंड के गुमला जिले के संदीप साहू का परिवार भी इसी आशा और निराशा के बीच झूल रहा है। 27 वर्षीय संदीप अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य हैं। उनके छोटे भाई-बहन अभी पढ़ाई कर रहे हैं। संदीप के साथी अजय कुमार ने कहा, "मुझे नहीं पता कि जब संतोष की पत्नी और पिता फोन कर बचाव अभियान के बारे में पूछेंगे, तो मैं उन्हें क्या जवाब दूंगा।" गुमला जिले के ही 24 वर्षीय अनुज साहू इस हादसे में फंसे सबसे कम उम्र के मजदूर हैं। वह भी अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ हैं, जिन पर उनके छोटे भाइयों की शिक्षा निर्भर है।

बचाव कार्य में जुटी 584 सदस्यीय टीम


राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के लिए सेना, नौसेना, सिंगरेनी कोलियरीज और अन्य एजेंसियों के 584 कुशल कर्मियों की टीम लगातार प्रयास कर रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय और राज्य आपदा मोचन टीमों ने अब तक सात बार सुरंग का निरीक्षण किया है। धातु की छड़ों को काटने के लिए गैस कटर लगातार इस्तेमाल किए जा रहे हैं, ताकि मजदूरों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

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