‘मुसलमानों में डर, नीतीश हैं जिम्मेदार’
प्रशांत किशोर ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग इस विधेयक से खुद को खतरे में महसूस कर रहा है। सरकार ध्रुवीकरण की राजनीति के तहत जल्दबाजी में यह कानून बना रही है। लोकसभा में भाजपा के पास बहुमत नहीं है, लेकिन नीतीश कुमार जैसे नेताओं के समर्थन की वजह से यह विधेयक पारित हो पा रहा है। अगर JDU और अन्य सहयोगी दल इस विधेयक के समर्थन में वोट नहीं देते, तो सरकार इसे कभी कानून नहीं बना सकती।"
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा मुसलमानों को अपना वोट बैंक नहीं मानती, लेकिन नीतीश कुमार जैसे नेता खुद को मुस्लिम समुदाय का हितैषी बताकर उनके साथ धोखा कर रहे हैं। "गांधी, लोहिया और जयप्रकाश नारायण (जेपी) की विचारधारा की बात करने वाले लोग अगर इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, तो यह पाखंड नहीं तो और क्या है?"
सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तय
बुधवार को लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा होगी, जहां सरकार इसे पारित कराने के लिए दृढ़संकल्पित है, वहीं विपक्ष इसे असंवैधानिक बताते हुए विरोध में उतरा है। राज्यसभा में इस पर बृहस्पतिवार को चर्चा होने की संभावना है। दोनों सदनों में इस बिल पर चर्चा के लिए आठ-आठ घंटे का समय आवंटित किया गया है। भाजपा के चार प्रमुख सहयोगी दल—तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU), शिवसेना और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)—ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर विधेयक के समर्थन में मतदान करने का निर्देश दिया है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के कुछ सहयोगी दल बिल में कुछ संशोधन चाहते हैं। एक NDA सहयोगी दल के वरिष्ठ नेता ने कहा कि उनकी चिंताओं का समाधान संसद की संयुक्त समिति ने किया है और NDA इस मुद्दे पर एकजुट रहेगा।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की बैठक में इस विधेयक पर आठ घंटे की चर्चा तय की गई, लेकिन इसे जरूरत के अनुसार बढ़ाया जा सकता है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बैठक के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्षी गठबंधन इंडिया के सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर सरकार पर उनकी आवाज दबाने का आरोप लगाया।





