इस बीच, आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने इस कार्रवाई को लेकर पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केजरीवाल का मकसद हाईवे खोलवाना नहीं था, बल्कि इसका असली उद्देश्य अपने लिए राज्यसभा का रास्ता खोलना था। मालीवाल ने यह भी कहा कि यह केजरीवाल के गुस्से और बदले की भावना का प्रतीक है। स्वाति मालीवाल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट (एक्स) पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि किसानों पर हुई इस रात की कार्रवाई का मकसद सिर्फ हाईवे खोलना नहीं था, बल्कि केजरीवाल की राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना था। उनके मुताबिक, केजरीवाल को लगता है कि ऐसा करने से लुधियाना के व्यापारी खुश होंगे, चुनाव में उनकी जीत होगी, और साथ ही अरोड़ा जी की राज्यसभा सीट भी खाली हो जाएगी।
मालीवाल ने यह भी तंज कसा कि जब किसान दिल्ली में बैठे थे, तो उस वक्त पंजाब में चुनाव भी होने वाले थे। उस समय केजरीवाल ने खुद को किसानों का सबसे बड़ा सेवादार बताया था, लेकिन अब जब वही किसान पंजाब में आंदोलन कर रहे हैं, तो केजरीवाल ने उनसे बातचीत करने के बजाय उनके खिलाफ तानाशाही तरीकों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
मालीवाल ने यह सवाल उठाया कि यह दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है? उनका मानना है कि यह कार्रवाई न केवल केजरीवाल के गुस्से का परिणाम है, बल्कि यह उनकी बदले की भावना को भी दर्शाता है।
बुधवार रात को पंजाब पुलिस ने शंभू और खनौरी बॉर्डर से किसानों को हटाने के लिए एक बड़ी ऑपरेशन चलाया। पुलिस ने बुलडोजर का इस्तेमाल करते हुए किसानों के अस्थायी शेड्स और मंचों को पूरी तरह से हटा दिया। किसान नेताओं और उनके समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई एक साल से भी ज्यादा समय से चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को समाप्त करने की एक बुरी कोशिश थी। पुलिस की कार्रवाई में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवन सिंह पंधेर समेत 200 से अधिक प्रदर्शनकारी किसानों को हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई देर रात शुरू हुई और पुलिस ने लगभग पूरी सड़क को खाली कर दिया।
वहीं, हरियाणा की तरफ से भी बॉर्डर खोलने का काम शुरू हो चुका है, जहां क्रेन की मदद से पत्थरों को हटाया जा रहा है और अस्थायी चौकियों को तोड़ा जा रहा है।
किसान नेताओं का कहना है कि यह कार्रवाई उनकी जायज मांगों को अनदेखा करने की एक और कोशिश है। किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार अब भी उनकी मांगों को लेकर अनदेखी कर रही है और इस तरह की सख्त कार्रवाई से उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले जब किसान दिल्ली में बैठे थे, तो मुख्यमंत्री केजरीवाल ने किसानों को अपनी पार्टी का समर्थन दिया था, लेकिन अब जब वे पंजाब में आंदोलन कर रहे हैं, तो केजरीवाल ने उनका समर्थन करना तो दूर, उनके खिलाफ ताकत का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया। किसानों का कहना है कि वे इस नाइंसाफी के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
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