भाजपा नेताओं ने उठाये पार्टी पर सवाल
बंगाल में बीजेपी के दो प्रमुख नेताओं ने पार्टी के नेतृत्व की आलोचना की है। भाजपा सांसद सौमित्र खान ने कहा कि अगर राज्य में स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भूमिका नहीं निभायी होती, तो पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाती। उन्होंने कहा कि पार्टी में कोई अनुभवी नेता नहीं है जिसने कभी चुनाव जीता हो, जो पार्टी का मार्गदर्शन ठीक से कर सके। नेताओं में संगठन की एकता को लेकर ज़रूरी ज्ञान की भी कमी है, सौमित्र खान ने बंगाल में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन का ज़िम्मेदार बंगाल भाजपा के नेतृत्व को माना है।
पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और बर्धमान-दुर्गापुर सीट से उम्मीदवार दिलीप घोष भी तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार कीर्ति आज़ाद से क़रीब 1.38 लाख़ वोटों से हार गये हैं ।दिलीप घोष ने सुवेंदु अधिकारी पर इशारों में निशाना साधते हुए कहा, “षड्यंत्र और चुगली राजनीति का हिस्सा है, मैं उन्हें उसी तरह लेता हूँ। इसके बावजूद मैंने काफ़ी मेहनत की, लेकिन सफलता नहीं मिली ।राजनीति में हर कोई डंडा लेकर नहीं घूमता है। पार्टी 2021 तक काफी तेज गति से बंगाल में आगे बढ़ रही थी, जो उसके बाद किसी तरह से अटक गयी है। पार्टी की जो उम्मीदें रहीं हैं, उसपर हम आगे नहीं बढ़ पाये हैं। पार्टी को इसकी जाँच करनी चाहिये और हर चीज़ पर चर्चा होनो चाहिये।” खबरों के अनुसार घोष को अध्यक्ष पद से हटवाने में सुवेंदु अधिकारी का हाथ था, उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के निर्णयों को प्रभावित किया था।
सुकांत मजूमदार निशाने पर
सुवेंदु अधिकारी के अलावा बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार भी निशाने पर है। मजूमदार ने हार की ज़िम्मेदारी ली है, लेकिन उन्होंने किसी का नाम लिये बिना कहा, “राज्य अध्यक्ष के तौर पर मुझे हार की ज़िम्मेदारी लेनी होगी।शायद में हर फ़ैसला नहीं ले सकता हूँ, लेकिन किसी ने तो फ़ैसला लिया था।” मजूमदार ने बालुरघाट सीट से मात्र 10 हज़ार वोटों के अंतर से जीत हासिल की है।
खबरों के अनुसार लोकसभा की कुल 42 सीटों में से 34 सीटों पर उम्मीदवार चुनने में सुवेंदु अधिकारी की बड़ी भूमिका रही है। जिसमें से सिर्फ़ सात उम्मीदवार ही जीत सके है। आरएसएस सुवेंदु की भूमिका से बिलकुल भी खुश नहीं है। बंगाल में भाजपा के अंदरूनी मामलों में जो हुआ उस पर आरएसएस ने चिंता ज़ाहिर की है। इसके अलावा राज्य की विधानसभा में पार्टी की भूमिका को लेकर संघ बदलाव चाहता है।





