कोर्ट ने सीएम ऑफिस के कामकाज पर उठाये सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने सीएम ऑफिस के कामकाज को लेकर सवाल उठाते हुए कहा, 'यूपी सरकार हमारे आदेशों का पालन नहीं कर रही है। हम आपको ऐसे नहीं छोड़ेंगे।' कोर्ट ने उन अधिकारियों के नाम पूछे जो कोर्ट के आदेश को नहीं मान रहे हैं। पांच अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यूपी कारागार के मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने के लिए कहा था और जवाब मांगा था कि वह कोर्ट के आदेश का पालन करने में विफल क्यों हो रहे हैं?
इसी क्रम में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस अभय ओका ने प्रमुख सचिव से 2-3 महीने की देरी की वजह पूछी। कोर्ट ने कहा, 'आप हर मामले में कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। हर केस जिसमें कैदियों को रिहा करने का विचार किया जा रहा है, आप उस पर कार्यवाही नहीं कर रहे हैं।' जवाब में प्रमुख सचिव ने कहा, 'सभी फाइल अधिकारियों के पास हैं। इस पर कार्रवाई की जाएगी, हमने पांच जुलाई को कारागार मंत्री को फाइल भेजी फिर 11 जुलाई को मुख्यमंत्री कार्यालय और छह अगस्त को राज्यपाल को भेजी गई।' इस पर जस्टिस ने कहा कार्रवाई में जो इतना समय लग रहा है, तो कैदी के नुकसान का भुगतान कौन करेगा?
जवाब में प्रमुख सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने उनकी फाइल रिसीव नहीं की। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वह इससे सहमत नहीं हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने कहा, 'आखिर सरकार आदेशों का पालन क्यों नहीं कर रही, हम आपको ऐसे नहीं छोड़ेंगे। आपको इस के लिए हलफनामा दायर करना होगा जिसमें यह लिखा हो कि मुख्यमंत्री कार्यालय आपकी फाइल रिसीव नहीं कर रहा। साथ ही उन अधिकारियों का भी नाम लिखा जो इसमें शामिल हैं।'
कोर्ट ने कहा, 'आप कैदियों के मौलिक अधिकारों से साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यूपी सरकार के पास देरी की वजह बताने का कोई स्पष्ट कारण नहीं है।'
कोर्ट ने कहा, 'आप कैदियों के मौलिक अधिकारों से साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यूपी सरकार के पास देरी की वजह बताने का कोई स्पष्ट कारण नहीं है।'





