सिर्फ कागजों पर हो रहा है काम
कोर्ट ने कहा कि पराली से निपटने की सभी कार्रवाई सिर्फ कागजों पर हो रही हैं। हमें आपके कागज में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमें एक भी निर्देश दिखाओ जो उन्होंने जारी किया हो। कोर्ट ने कहा कि क्या सीएक्यूएम अधिनियम की धारा 14 के तहत कोई कार्रवाई की गई है? आप मूकदर्शक बने हुए हैं। यदि आप यह संदेश नहीं दे सकते हैं कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, तो ये प्रावधान केवल कागज पर ही रह जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर साल पराली जलाने की समस्या सामने आती है। आप पराली जलाने के खिलाफ कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठा रहे।
सीएक्यूएम को अधिक एक्टिव रहने की जरुरत
सीएक्यूएम के अध्यक्ष ने कोर्ट में जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने समिति बनाने के बाद 82 कानूनी आदेश और 15 सुझाव जारी किए हैं। उनकी टीम ने कई जगहों का निरीक्षण किया है और कई फैक्ट्रियों को बंद करने का आदेश दिया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि सीएक्यूएम तीन साल से अस्तित्व में है, लेकिन इसने केवल 82 निर्देश जारी किए हैं। इतनी कार्रवाई काफी नहीं है। आयोग को और अधिक एक्टिव होने की जरूरत है। आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके निर्देशों से प्रदूषण की समस्या कम हो रही है या नहीं।
पिछले साल पंजाब सरकार से भी किया था सवाल
पिछले साल नवंबर में दिल्ली के प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और पंजाब सरकार को फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और पंजाब सरकार से पूछा था कि प्रदूषण की समस्या को रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के किसानों के साथ हमदर्दी दिखाई थी। कोर्ट ने कहा था कि पराली जलाने वाले किसानों को विलेन बना दिया जाता है। कोई उनका पक्ष नहीं सुनता है। किसानों के पास पराली जलाने के लिए कोई न कोई कारण जरूर होगा।





