याचिका में कहा गया है कि आगरा स्थित उनके निजी निवास पर हाल ही में हमला और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं, साथ ही उन्हें और उनके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं। इस पृष्ठभूमि में उन्होंने केंद्र सरकार से 'केंद्रीय सुरक्षा बलों' की तैनाती की मांग की है, जिससे उनके, उनके परिजनों और आगरा स्थित आवास की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सांसद और उनके बेटे की ओर से याचिका में इस बात की भी मांग की गई है कि आगरा के पुलिस कमिश्नर को निर्देशित किया जाए कि भविष्य में किसी भी प्रकार की ऐसी घटना को दोहराने से रोका जाए। साथ ही याचिकाकर्ताओं ने आगरा में 12 अप्रैल को कुछ संगठनों द्वारा प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर भी रोक लगाने की मांग की है, जिससे हालात और अधिक न बिगड़ें।
याचिका में यह स्पष्ट किया गया है कि रामजीलाल सुमन अपने बयान पर कायम हैं, लेकिन बयान के बाद जिस तरह का उग्र विरोध और हिंसक माहौल पैदा हुआ, उससे उन्हें और उनके परिवार को वास्तविक खतरा है। वे चाहते हैं कि हमले और धमकी की घटनाओं की निष्पक्ष और उच्च-स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इस याचिका पर अगले सप्ताह इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में सुनवाई होगी। यह बेंच जस्टिस राजीव गुप्ता की अध्यक्षता में गठित की गई है। मामले में सांसद की ओर से पेश होने वाले अधिवक्ताओं में वरिष्ठ वकील इमरान उल्ला और अधिवक्ता विनीत विक्रम शामिल हैं, जो अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखेंगे।
गौरतलब है कि हाल ही में रामजीलाल सुमन ने राणा सांगा को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया था, जिसके बाद उन्हें न केवल राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ा, बल्कि उनके निजी निवास पर हमला भी हुआ। इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, और अब यह मामला न्यायपालिका की निगरानी में प्रवेश कर चुका है।
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