सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, किसी भी विधायक को एक सत्र से अधिक समय के लिए निलंबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की गहन समीक्षा के लिए एक समिति गठित की जाएगी, जो यह आकलन करेगी कि क्या अबू आजमी को विधायक पद से हटाया जा सकता है या नहीं।
बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद अबू आजमी ने सफाई देते हुए कहा कि उनका मकसद शिवाजी महाराज या संभाजी महाराज का अपमान करना नहीं था। उन्होंने कहा, "मेरे शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। मैंने वही कहा है जो इतिहासकारों और लेखकों ने लिखा है। अगर मेरे बयान से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं बिना शर्त माफी मांगता हूं और अपने शब्द वापस लेता हूं।"
इस पूरे विवाद के बीच अबू आजमी के खिलाफ महाराष्ट्र के ठाणे में केस दर्ज किया गया है। आजमी ने अपने बयान में कहा था कि "मैं औरंगजेब को क्रूर, अत्याचारी या असहिष्णु शासक नहीं मानता। इन दिनों फिल्मों के माध्यम से मुगल बादशाहों की विकृत छवि पेश की जा रही है।" उनके इस बयान ने सियासी हलकों में हड़कंप मचा दिया और विरोधियों ने इसे शिवाजी महाराज का अपमान करार दिया। गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र 26 मार्च को समाप्त हो रहा है, जिसके चलते अबू आजमी को फिलहाल इसी सत्र के लिए निलंबित किया गया है। लेकिन यह मामला अभी खत्म होता नहीं दिख रहा, क्योंकि सरकार इस पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर रही है।
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