सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल थे, ने तीखे सवाल पूछते हुए कहा, “आपको यह जानकारी कहां से मिली कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है? आपके पास क्या विश्वसनीय स्रोत हैं?”
कोर्ट ने कहा कि यदि राहुल गांधी सच्चे भारतीय होते, तो इस तरह की बात सार्वजनिक मंचों पर नहीं कहते। बेंच ने आगे कहा कि जब सीमा पर विवाद हो, तब एक जिम्मेदार नेता को संसद में सवाल पूछने चाहिए, न कि सोशल मीडिया पर विवादित बयान देना चाहिए।
राहुल गांधी को कोर्ट की सलाह
बेंच ने राहुल गांधी से कहा, “आप विपक्ष के नेता हैं। अपनी बात संसद में कहिए, सोशल मीडिया पर नहीं।”
यह टिप्पणी उस मामले के संदर्भ में आई है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान भारतीय सेना के बारे में कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर आपराधिक शिकायत दर्ज की गई थी।
अदालत की कार्यवाही पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राहुल गांधी को राहत भी दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ अधीनस्थ अदालत में चल रही कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह मामला दिसंबर 2022 की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दी गई कथित टिप्पणी से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता उदय शंकर श्रीवास्तव ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने उस दौरान चीन के साथ सीमा गतिरोध को लेकर भारतीय सेना को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी।
इससे पहले, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 29 मई को राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने निचली अदालत द्वारा जारी समन और शिकायत को दुर्भावनापूर्ण करार देते हुए चुनौती दी थी।





