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संजय राउत बोले– मराठी अगर महाराष्ट्र में नहीं, तो कहाँ? पाकिस्तान में?, केंद्र सरकार को दी चेतावनी

राउत ने कहा कि कुछ लोग मराठी संस्कृति और भाषा को अपनाने से इनकार करते हैं। उन्होंने आशीष शेलार के बयान को ‘भाजपा की संकीर्ण मानसिकता’ का प्रतीक बताया।

संजय राउत बोले– मराठी अगर महाराष्ट्र में नहीं, तो कहाँ? पाकिस्तान में?, केंद्र सरकार को दी चेतावनी
फोटो: संजय राउत बोले– मराठी अगर महाराष्ट्र में नहीं, तो कहाँ? पाकिस्तान में?, केंद्र सरकार को दी चेतावनी
महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर छिड़े विवाद के बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा, "अगर मराठी महाराष्ट्र में नहीं बोली जाएगी, तो क्या पाकिस्तान, बांग्लादेश या नेपाल में बोली जाएगी?" राउत का यह बयान भाजपा नेता आशीष शेलार की उस टिप्पणी के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने मराठी भाषा के समर्थन में हो रहे आंदोलनों की तुलना आतंकवाद से कर दी थी।

राउत ने कहा कि कुछ लोग मराठी संस्कृति और भाषा को अपनाने से इनकार करते हैं। उन्होंने आशीष शेलार के बयान को ‘भाजपा की संकीर्ण मानसिकता’ का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, "अगर कोई अपनी भाषा और पहचान के लिए आंदोलन करता है, तो उसकी तुलना आतंकवादियों से करना दुर्भाग्यपूर्ण है।"

संजय राउत ने रविवार को कहा कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ मंच साझा करने से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित महायुति के सभी नेता घबरा गए हैं। शनिवार को मुंबई के वर्ली में 'आवाज मराठीचा - विजय रैली' आयोजित की गई थी, जिसमें दोनों चचेरे भाई पहली बार दो दशक बाद एक साथ नज़र आए। इस रैली में राज्य सरकार द्वारा हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने संबंधी आदेशों को वापस लेने का स्वागत किया गया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रैली को "रुदाली जैसा भाषण" कहा था। इस पर राउत ने पलटवार करते हुए कहा, "अब फडणवीस और शिंदे को रोने का कार्यक्रम शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि ठाकरे बंधुओं की एकता भाजपा के लिए बड़ा झटका है।" राउत ने कहा कि महाराष्ट्र ने हिंदी थोपने की कोशिशों के खिलाफ निर्णायक जीत दर्ज की है। यह जीत ठाकरे बंधुओं और उनके समर्थकों की एकता का परिणाम है। उन्होंने यह भी बताया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन जैसे अन्य क्षेत्रीय नेता भी केंद्र सरकार की भाषा नीति का विरोध कर रहे हैं और राज्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हो रहे हैं।