मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को इस समिति की घोषणा करते हुए कहा, "भारतीयता हमारा धर्म है और संविधान हमारा पवित्र ग्रंथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम पूरे देश में समान अधिकारों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।" समिति का मुख्य उद्देश्य गुजरात में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए एक विस्तृत मसौदा तैयार करना है।
समिति में जस्टिस देसाई के अलावा चार अन्य विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है: सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सीएल मीना, वरिष्ठ अधिवक्ता आरसी कोडेकर, शिक्षाविद दक्षेश ठाकर, और सामाजिक कार्यकर्ता गीताबेन श्रॉफ। इन विशेषज्ञों के सहयोग से समिति यूसीसी के मसौदे को तैयार करेगी, जो राज्य में समान अधिकारों और क़ानूनों की स्थापना में सहायक साबित होगा।
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई भारतीय न्यायिक प्रणाली की एक प्रतिष्ठित शख्सियत हैं। उनका कानूनी सफर 1970 के दशक में मुंबई से शुरू हुआ, और उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में न्यायिक भूमिका निभाई। 1996 में बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त होने के बाद, उन्होंने 2011 में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला। सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने के बाद भी जस्टिस देसाई विभिन्न न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय रही हैं। उन्होंने बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण, परिसीमन आयोग और लोकपाल चयन समिति जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं में नेतृत्व किया है।
उत्तराखंड सरकार ने पिछले सप्ताह ही समान नागरिक संहिता लागू करने का ऐलान किया था, जो कि जस्टिस देसाई की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर हुआ। अब गुजरात भी इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है, और देशभर में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया को गति देने के लिए गुजरात सरकार की यह पहल एक अहम कड़ी साबित होगी। जस्टिस देसाई की अगुवाई में गुजरात में यूसीसी लागू करने के लिए कानूनी आधार तैयार किया जाएगा, जिससे राज्य में समान अधिकारों और कानूनों की स्थापना संभव हो सकेगी।
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