गौरतलब है कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए हैं। इन्हीं कार्रवाइयों के तहत भारत ने 1960 में हुई सिंधु जल संधि को रद्द करने का फैसला किया है, जिससे पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई है।
ओम प्रकाश राजभर ने आगे कहा, "ये भारत सरकार की रणनीतिक नीति का हिस्सा है। दुश्मन को कैसे जवाब देना है, ये केंद्र सरकार तय करेगी, न कि कोई धर्मगुरु। हम सबको इस फैसले का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।"
रविवार को दिए अपने बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा था, "अगर कोई पानी रोकता है, तो रोकने दो। ये नदियाँ हजारों वर्षों से बह रही हैं। आप इस पानी को कहां ले जाएंगे? यह आसान नहीं है।" उन्होंने कहा कि देश में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने की आवश्यकता है, लेकिन नफरत फैलाने वाली नीतियां देशहित में नहीं हैं।
मदनी ने यह भी जोड़ा, "मैं मुसलमान हूं और मैंने अपनी पूरी जिंदगी इस देश में बिताई है। लेकिन जो माहौल बन रहा है, वह देश के लिए उचित नहीं है।"
मौलाना मदनी के इस बयान पर भाजपा की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शाहनवाज़ हुसैन ने इसे 'आपत्तिजनक' बताते हुए कहा, "अगर पाकिस्तान खून-खराबा कर सकता है, तो क्या हम उसके लिए पानी भी नहीं रोक सकते?" उन्होंने कहा कि भारत सरकार का यह कदम पूरी तरह उचित और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक निर्णायक पहल है।





