'ड्रोन केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि औद्योगिक नवाचार का परिणाम'
कांग्रेस नेता ने आगे जोर देते हुए कहा कि ड्रोन महज एक तकनीक नहीं हैं, बल्कि यह एक मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र और नीचे से ऊपर तक के नवाचारों का परिणाम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तकनीक तभी फल-फूल सकती है जब देश में एक संगठित और ठोस औद्योगिक प्रणाली हो।
गांधी ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार इस मूलभूत सिद्धांत को नहीं समझ रही है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री एआई पर लंबे-लंबे भाषण देते हैं, लेकिन भारत के प्रतिस्पर्धी देश तेजी से उभरती हुई तकनीकों में आगे बढ़ रहे हैं।"
'सिर्फ बयानबाजी नहीं, मजबूत उत्पादन क्षमता जरूरी'
राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि एक मजबूत उत्पादन आधार विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत में अप्रतिम प्रतिभा, पैमाना और क्षमता मौजूद है, जिसका सही दिशा में उपयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, "हमें अपने युवाओं को रोजगार देने और भारत को भविष्य में आगे ले जाने के लिए एक स्पष्ट दृष्टि और वास्तविक औद्योगिक ताकत का निर्माण करना चाहिए।"
गांधी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह केवल वादों तक सीमित न रहे, बल्कि ठोस औद्योगिक नीतियों को लागू कर भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की ओर अग्रसर करे।
राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत एआई, ड्रोन और अन्य उभरती तकनीकों के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास कर रहा है। हालांकि, उनका मानना है कि सरकार की रणनीति केवल प्रचार तक सीमित है और व्यवहारिक औद्योगिक दृष्टिकोण का अभाव है।
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