कैसे मचा हाहाकार?
महाकुंभ में मौनी अमावस्या के लिए मंगलवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा था। दोपहर होते-होते भीड़ इतनी बेकाबू हो गई कि कई जगहों पर बैरिकेडिंग तोड़ दी गई। जैसे ही रात में स्नान शुरू हुआ, संगम तट और उसके आसपास लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गई। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कुछ श्रद्धालुओं ने अखाड़ों के लिए बनाई गई बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की और जिसे जहां जगह मिली, वह उधर ही बढ़ने लगा।
आधी रात के बाद संगम तट पर इतनी ज्यादा भीड़ इकट्ठा हो गई कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। रात करीब दो बजे अचानक भगदड़ मच गई, जिससे चारों ओर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जो नीचे गिरा, वह दोबारा उठ नहीं सका। जो भागने की कोशिश कर रहा था, वह भी भीड़ के दबाव में गिर पड़ा। हादसा पिलर नंबर 157 के पास हुआ, जहां स्थिति सबसे ज्यादा भयावह थी।
मेला कंट्रोल रूम और पुलिस कंट्रोल रूम को जैसे ही भगदड़ की सूचना मिली, तुरंत पैरामिलिट्री फोर्स और एंबुलेंस को मौके पर भेजा गया। राहत टीमों ने श्रद्धालुओं को निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का कार्य शुरू किया। केंद्रीय अस्पताल में घायलों का इलाज जारी है, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण कई लोगों को अस्पताल के फर्श पर ही लिटा दिया गया। मेलाधिकारी विजय किरन आनंद के अनुसार, इस भगदड़ का मुख्य कारण एक अफवाह थी, जिसके चलते लोग घबरा गए और अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
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