राज्यसभा में कुल सदस्य 236 हैं, हालांकि, कुछ परिस्थितियों में यह संख्या 245 तक पहुंच सकती है, क्योंकि नौ सीटें फिलहाल रिक्त हैं। इस उच्च सदन में किसी विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को 119 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा।
अगर संख्याओं का विश्लेषण किया जाए तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उच्च सदन में सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके पास 98 सांसद हैं। इसके अलावा, जेडीयू, तेदेपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अन्य सहयोगी दलों का समर्थन भी एनडीए को प्राप्त है, जिससे सरकार के पक्ष में समीकरण मजबूत होते दिख रहे हैं।
राज्यसभा में एनडीए को विभिन्न दलों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा, पत्तली मक्कल काची, तमिल मनिला कांग्रेस (टीएमसी-एम), नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP), रामदास आठवले की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई-ए) और दो निर्दलीय सांसद शामिल हैं। इन सभी के समर्थन से सरकार अपने विधेयक को पास कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। राज्यसभा में विपक्ष भी इस विधेयक के खिलाफ लामबंद हो चुका है, हालांकि उसकी स्थिति एनडीए के संख्याबल के सामने उतनी मजबूत नहीं है।
कांग्रेस उच्च सदन में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है, जिसके पास 27 सांसद हैं। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 13, आम आदमी पार्टी (AAP) के 10, डीएमके के 10, वाईएसआर कांग्रेस के 7, आरजेडी के 5, समाजवादी पार्टी के 4 और शिवसेना (यूबीटी) के 2 सांसद हैं।
इनके अलावा, बीजू जनता दल (BJD) और एआईएडीएमके (AIADMK) ने भी इस विधेयक का विरोध करने का संकेत दिया है। वहीं, कुछ दलों का रुख अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, जिनमें बीआरएस, बीएसपी और एमएनएफ शामिल हैं।
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