बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी की भागीदारी
बिम्सटेक (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों का एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें बांग्लादेश, भारत, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल और भूटान शामिल हैं। यह संगठन क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर कार्य करता है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह तीसरी थाईलैंड यात्रा होगी, और इस दौरान वह क्षेत्रीय व्यापार, समुद्री सुरक्षा और भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति' (Act East Policy) को मजबूत करने पर जोर देंगे। इस शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच सामरिक साझेदारी और आर्थिक सहयोग पर भी महत्वपूर्ण चर्चा होगी।
श्रीलंका यात्रा: संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास
थाईलैंड के बाद प्रधानमंत्री मोदी 4 अप्रैल को कोलंबो रवाना होंगे, जहां वह 4 से 6 अप्रैल 2025 तक श्रीलंका की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। यह यात्रा श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका के निमंत्रण पर हो रही है।
यह प्रधानमंत्री मोदी की 2015 के बाद श्रीलंका की चौथी यात्रा होगी। इससे पहले, वह 2015, 2017 और 2019 में श्रीलंका का दौरा कर चुके हैं। इस यात्रा का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि हाल ही में दोनों देशों के बीच मछुआरों की गिरफ्तारी को लेकर बढ़ता तनाव देखने को मिला है।
भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों की गिरफ्तारी का मुद्दा वर्षों से विवाद का कारण बना हुआ है। श्रीलंकाई नौसेना के दावे के अनुसार, 2024 में अब तक 550 से अधिक भारतीय मछुआरे उनकी जलसीमा में अवैध रूप से मछली पकड़ने के आरोप में गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अकेले इस साल 150 से अधिक भारतीय मछुआरों को हिरासत में लिया गया है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस मुद्दे को लेकर कई बार विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखा है और दोनों देशों के बीच स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों के अधिकारों और समुद्री सीमा विवाद को हल करने के लिए एक अहम मौका हो सकती है।
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