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PM In Varanasi: काशी से पीएम मोदी का पाकिस्तान पर वार: ‘बेटियों के सिंदूर का बदला लिया’

PM In Varanasi: पीएम मोदी ने कहा,“आज मैं ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार काशी आया हूं।पहलगाम में 26 निर्दोषों की नृशंस हत्या हुई थी मेरा हृदय बेहद व्यथित था।

PM In Varanasi: काशी से पीएम मोदी का पाकिस्तान पर वार: ‘बेटियों के सिंदूर का बदला लिया’
फोटो: PM In Varanasi: काशी से पीएम मोदी का पाकिस्तान पर वार: ‘बेटियों के सिंदूर का बदला लिया’
वाराणसी की पावन धरती से पीएम मोदी ने शनिवार  को पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पहलगाम हमले का बदला लेने का जो वचन उन्होंने दिया था, वह ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए पूरा हो चुका है। पीएम मोदी ने इसे 140 करोड़ देशवासियों की एकता और महादेव के आशीर्वाद का परिणाम बताया।

PM In Varanasi: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार वाराणसी में पीएम मोदी


प्रधानमंत्री ने कहा, “आज मैं ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार काशी आया हूं। जब 22 अप्रैल को पहलगाम में 26 निर्दोषों की नृशंस हत्या हुई थी, मेरा हृदय बेहद व्यथित था। मैंने बाबा विश्वनाथ से पीड़ित परिवारों को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की थी। साथ ही, मैंने जो वचन अपनी बेटियों के सिंदूर का बदला लेने का दिया था, वो अब पूरा हो चुका है। यह सब महादेव की कृपा से संभव हुआ है।” पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को भारत की संकल्पशक्ति का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह न सिर्फ शहीदों को श्रद्धांजलि है, बल्कि आतंकियों और उनके आकाओं के लिए कड़ा संदेश भी है।

काशी में देशभर के किसानों से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों की खुशहाली के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा, “पहले की सरकारें किसानों के नाम पर सिर्फ घोषणाएं करती थीं, लेकिन हमारी सरकार जो कहती है, वो करके दिखाती है। आज PM किसान सम्मान निधि इसका जीता-जागता प्रमाण है।”

अपने भाषण में पीएम मोदी ने सावन महीने की धार्मिक और सांस्कृतिक भावना का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कांवड़ यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इन दिनों काशी में गंगाजल लेकर चलते शिवभक्तों की छवियाँ एक अलौकिक अनुभूति पैदा करती हैं। उन्होंने कहा, “मेरी भी इच्छा थी कि सावन के पवित्र महीने में बाबा विश्वनाथ और मार्कंडेय महादेव का दर्शन करूं। लेकिन मेरे जाने से यदि भक्तों को कोई असुविधा होती, तो मैं वह नहीं चाहता। इसलिए आज यहीं से भोलेनाथ और मां गंगा को प्रणाम करता हूं।”