इस दौरान डीएमके सांसदों ने लोकसभा में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु के किसानों के साथ भेदभाव कर रही है और जानबूझकर उन्हें पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ देने में देरी कर रही है। इस पर शिवराज सिंह चौहान ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि देरी केंद्र सरकार के कारण नहीं, बल्कि राज्य सरकार के कारण हो रही है। उन्होंने बताया कि 14,000 किसानों की पात्रता जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है, जिसकी वजह से उनके खाते में धनराशि नहीं पहुंच पाई है। कृषि मंत्री ने जोर देकर कहा कि जैसे ही राज्य सरकार सूची अपडेट करेगी, केंद्र सरकार तुरंत फंड ट्रांसफर कर देगी।
शिवराज सिंह चौहान ने सदन में तमिलनाडु सरकार के मंत्रियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "मैं खुद दो बार तमिलनाडु गया हूं। एक बार कृषि मंत्रालय के काम से और एक बार ग्रामीण विकास मंत्रालय के काम से, लेकिन दुर्भाग्यवश दोनों ही बार मेरी बैठक में न तो ग्रामीण विकास मंत्री आए और न ही कृषि मंत्री। मैं किसी पर आरोप नहीं लगा रहा हूं, लेकिन मैं यह अनुरोध करना चाहता हूं कि तमिलनाडु सरकार इस योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाए। केंद्र सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि तमिलनाडु के सभी पात्र किसानों को समय पर योजना का लाभ मिले। हम तमिलनाडु के लोगों, उनकी भाषा, उनकी संस्कृति का पूरा सम्मान करते हैं और यह कहना कि केंद्र सरकार भेदभाव कर रही है, पूरी तरह गलत है। हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि तमिलनाडु के किसानों को समय पर पूरा लाभ मिल सके।"
शिवराज सिंह चौहान ने सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस योजना की विशेषताओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा छोटे और गरीब किसानों की चिंता की है। पहले किसानों को अपनी कृषि संबंधी जरूरतों के लिए कर्ज लेना पड़ता था और कई बार उन्हें खाद, बीज या अन्य कृषि कार्यों के लिए 1-2 हजार रुपये भी ब्याज पर लेने पड़ते थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समस्या को समझते हुए साल 2019 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की। इस योजना के तहत केंद्र सरकार किसानों के खाते में सालाना 6,000 रुपये तीन किस्तों में भेजती है। यह पैसा पूरी तरह डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से किसानों के खाते में पहुंचता है। कृषि मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी था जब सरकारों द्वारा भेजी गई आर्थिक सहायता का पूरा पैसा लाभार्थियों तक नहीं पहुंचता था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बयान का हवाला देते हुए कहा, "एक समय था जब 1 रुपये भेजने पर गरीब के पास सिर्फ 15 पैसे पहुंचते थे, लेकिन आज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसानों के खाते में सीधे पूरा 6 हजार रुपये पहुंचे। डीबीटी के माध्यम से एक क्लिक में किसानों को पैसा ट्रांसफर किया जाता है और इसमें एक रुपये की भी हेराफेरी संभव नहीं है।"





