उन्होंने बताया कि 2017 में लागू की गई स्वास्थ्य नीति पहले की नीतियों की तुलना में अधिक व्यापक और समग्र (Comprehensive) है। इस नीति में उपशामक (Palliative), उपचारात्मक (Curative), पुनर्वास (Rehabilitative) और निवारक (Preventive) दृष्टिकोण जैसे महत्वपूर्ण तत्व शामिल किए गए हैं।
जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की स्वास्थ्य नीति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले एलोपैथी और आयुष चिकित्सा प्रणाली के बीच कोई समन्वय नहीं था, लेकिन अब दोनों को एकीकृत किया जा रहा है। दिल्ली एम्स में आयुष ब्लॉक स्थापित किया जाना इसका प्रमाण है।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि अब विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के समावेश से स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा दी जा रही है। एम्स में चल रहे अनुसंधान कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि योग और उच्च रक्तचाप के संबंध में अध्ययन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाना है। इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें टेलीकॉलिंग सेवाओं, आधुनिक टीबी टेस्टिंग किट, आरटी-पीसीआर किट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एक्स-रे मशीन का उपयोग शामिल है।
जेपी नड्डा ने बताया कि अब सिकल सेल डिजीज की टेस्टिंग मात्र ₹25 में उपलब्ध है, जबकि पहले इसकी लागत ₹350 हुआ करती थी। यह तकनीकी प्रगति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
स्वास्थ्य मंत्री ने मेडिकल शिक्षा के विस्तार पर बात करते हुए कहा कि 1960 में पंडित नेहरू ने पहला एम्स खोला था, लेकिन 1998 तक कोई नया एम्स नहीं खोला गया। इसके बाद, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में छह एम्स खोले गए, जबकि यूपीए सरकार के कार्यकाल में केवल रायबरेली में एक एम्स स्थापित हुआ।
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 10 नए एम्स खोले गए हैं, और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए गए हैं।
जेपी नड्डा ने वायरोलॉजी (Virology) के क्षेत्र में भारत की प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पुणे का वायरोलॉजी संस्थान अब विश्व स्तरीय अनुसंधान केंद्र बन चुका है। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान भारत में बड़े पैमाने पर टेस्टिंग लैब्स स्थापित की गईं, जिससे संक्रमण की निगरानी और रोकथाम में महत्वपूर्ण मदद मिली।
इसके अलावा, देश में चार नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) खोले जा रहे हैं, जो भविष्य में संक्रमणजनित बीमारियों से निपटने में मदद करेंगे।





