"संविधान में बदलाव की बात कहां तक सही?"
नड्डा ने कहा कि कर्नाटक विधानसभा ने मुसलमानों को सरकारी ठेकों में 4% आरक्षण देने वाला विधेयक पारित किया है, जो संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के उपमुख्यमंत्री ने यह तक कहा कि "अगर जरूरत पड़ी, तो संविधान में बदलाव किया जाएगा।" भाजपा नेताओं ने इसे बाबा साहेब आंबेडकर की विचारधारा के खिलाफ बताया। रिजिजू ने आरोप लगाया कि "कांग्रेस नेता आंबेडकर की तस्वीर दिखाकर दिखावा करते हैं, लेकिन उनके सिद्धांतों को नहीं मानते।"
भाजपा के तीखे हमलों के जवाब में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि "जो संविधान बाबा साहेब आंबेडकर ने बनाया है, उसे कोई बदल नहीं सकता।" उन्होंने सत्ता पक्ष पर पलटवार करते हुए कहा, "हम कश्मीर से कन्याकुमारी तक संविधान की रक्षा के लिए खड़े हैं, जबकि असली खतरा संविधान को तोड़ने वालों से है।"
हंगामे के बीच सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी।
लोकसभा में भी हंगामा, समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन
इधर, लोकसभा में भी कार्यवाही बाधित रही। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर प्रश्नकाल के दौरान विरोध जताया। जैसे ही लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी शिक्षकों की कमी पर पूरक प्रश्न पूछने लगीं, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव और अन्य सदस्य पोस्टर लहराते हुए हंगामा करने लगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नाराजगी जताते हुए कहा, "सदन में पोस्टरबाजी न करें, अन्यथा कार्रवाई होगी।" लेकिन जब हंगामा जारी रहा, तो कार्यवाही कुछ ही मिनटों में दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
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