Molitics Logo
होम कश्मीर पर पाकिस्तान की साजिश नाकाम, यूएन में भारत को अमेरिका-फ्रांस का समर्थन

कश्मीर पर पाकिस्तान की साजिश नाकाम, यूएन में भारत को अमेरिका-फ्रांस का समर्थन

जम्मू-कश्मीर के पर्यटक स्थल पहल्गाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। हमले के तुरंत बाद विश्व के अनेक देशों ने |

कश्मीर पर पाकिस्तान की साजिश नाकाम, यूएन में भारत को अमेरिका-फ्रांस का समर्थन
फोटो: कश्मीर पर पाकिस्तान की साजिश नाकाम, यूएन में भारत को अमेरिका-फ्रांस का समर्थन
जम्मू-कश्मीर के पर्यटक स्थल पहल्गाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। हमले के तुरंत बाद विश्व के अनेक देशों ने इसकी कठोर शब्दों में निंदा की और आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े होने की बात कही। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने भी हाल ही में इस आतंकी हमले पर आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें इस क्रूर और अमानवीय कृत्य की घोर निंदा की गई। परिषद ने दोहराया कि ऐसे हमलों के ज़िम्मेदार अपराधियों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए, और जो देश या तत्व इन गतिविधियों को समर्थन या शरण देते हैं, उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाना आवश्यक है।

बयान के मसौदे को अंतिम रूप देते समय पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी पुरानी चालों का सहारा लेते हुए कश्मीर को "विवादित क्षेत्र" घोषित कराने की कोशिश की। उसने यूएन के अधिकारियों के समक्ष इस शब्दावली को शामिल करने का जोरदार प्रयास किया। हालांकि, भारत ने इस प्रयास का पुरजोर विरोध किया और अमेरिका तथा फ्रांस जैसे प्रभावशाली देशों के समर्थन से पाकिस्तान की कोशिश को असफल बना दिया। गौरतलब है कि अप्रैल 2025 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता फ्रांस के पास है। परिषद की ओर से जो आधिकारिक प्रेस वक्तव्य जारी किया गया, वह फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि जेरोम बोनाफोंट द्वारा प्रस्तुत किया गया। बोनाफोंट 2007 से 2011 तक भारत में फ्रांसीसी राजदूत रह चुके हैं, जिससे भारत के साथ उनके संबंधों का विशेष महत्व है।

 इस मुद्दे पर पाकिस्तान, जो वर्तमान में यूएनएससी का अस्थायी (गैर-स्थायी) सदस्य है, ने अपने सभी कूटनीतिक हथकंडों का उपयोग किया। पाकिस्तान की तरफ से यह दावा किया गया कि उनके प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक निष्पक्ष और अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग कर रहे हैं। इस दावे को चीन का समर्थन भी प्राप्त हुआ। वहीं, भारत चाहता था कि यूएन के बयान में भारत सरकार का भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाए जिससे हमले के पीड़ितों के प्रति एकजुटता का भाव प्रदर्शित हो। लेकिन पाकिस्तान की साजिशों और चीन के समर्थन के चलते यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, भारत ने इस बात को उजागर किया कि हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुद यह स्वीकार किया है कि पाकिस्तान का इतिहास आतंकवादी संगठनों को समर्थन और वित्तीय मदद देने का रहा है। 

भारत ने इस बयान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह एक स्पष्ट प्रमाण है कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला एक ‘दुष्ट राष्ट्र’ (rogue state) बन चुका है। उसने न केवल दक्षिण एशिया में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सुरक्षा और शांति को खतरे में डाल रखा है। भारत के मुताबिक, पाकिस्तान की कथनी और करनी में भारी अंतर है। एक तरफ वह दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ सहयोग का दिखावा करता है, वहीं दूसरी ओर अपनी जमीन का उपयोग आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों के लिए करता है और अपने नेतृत्व द्वारा खुलेआम कट्टरपंथी संगठनों का समर्थन किया जाता है। भारत ने इस विषय में वैश्विक समुदाय से आग्रह किया है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में सहन न किया जाए और जो देश इसे पनाह देते हैं, उन्हें कड़ी सज़ा दी जाए। यह मामला केवल एक क्षेत्रीय संकट नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। यूएनएससी का यह बयान, पाकिस्तान की चालबाज़ियों के बावजूद, आतंकवाद के विरुद्ध भारत की दृढ़ भूमिका और वैश्विक समर्थन को दर्शाता है।