उन्होंने जम्मू-कश्मीर की जनता से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य के नागरिक एकजुट होकर आतंकवाद को करारा जवाब दें। उन्होंने कहा, “हमें सबसे पहले खुद को भारतीय समझना चाहिए, उसके बाद ही डोगरी, कश्मीरी, पंडित या पंजाबी। यही एकता हमारी सबसे बड़ी ताकत है।” इंद्रेश कुमार ने अपने बयान में पाकिस्तान को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान स्वयं अंदरूनी संकटों से घिरा हुआ है और धीरे-धीरे विघटन की ओर बढ़ रहा है। “आज पाकिस्तान सिंध, बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पीओजेके और पंजाब जैसे इलाकों में स्वतंत्रता की मांगों से जूझ रहा है। वह खुद को भारत के खिलाफ नफरत फैलाकर बचाना चाहता है, लेकिन यह उसकी सबसे बड़ी भूल है।"
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने इस आतंकी हमले में धर्म के आधार पर की गई हिंसा को विशेष रूप से भयावह बताया। उन्होंने कहा, “अगर हम मानते हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, तो इस हमले की गहराई से जांच होनी चाहिए। यदि हमलावर ने हमला करने से पहले पीड़ित का धर्म पूछा, तो यह दर्शाता है कि इस हिंसा के पीछे संकीर्ण और घृणित सोच छिपी है।”
उन्होंने आगे कहा कि “पिछले 30-40 वर्षों में भारत ने हजारों निर्दोष नागरिकों को आतंकवाद के कारण खोया है। उन सभी की अंतिम विदाई में न गीता पढ़ी गई, न गुरबानी। इसलिए हमें यह दिखावे की बात बंद करनी चाहिए कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। अगर ऐसा है, तो फिर हर परिस्थिति में यह विचार समान रूप से लागू किया जाए।”
आरएसएस नेता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब वक्त आ गया है कि भारत, खासकर जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद और उसकी विचारधारा से एकदम अलग खड़ा हो। उन्होंने समाज और सरकार से आग्रह किया कि वे मिलकर यह संदेश दें कि भारत आतंक के खिलाफ एकजुट है और इस चुनौती को निर्णायक रूप से परास्त करेगा।





