कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें एक अखबार के माध्यम से यह जानकारी मिली कि खुफिया रिपोर्ट प्रधानमंत्री को दी गई थी, और उसी रिपोर्ट के आधार पर उनकी यात्रा रद्द हुई। उन्होंने कहा, "अगर प्रधानमंत्री के लिए खतरे को देखते हुए उनका दौरा रद्द किया गया, तो आम नागरिकों की जान की कीमत क्यों नहीं समझी गई? क्या उनकी जानें कम कीमती थीं?"
खरगे ने यह भी कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुआ हमला देश के लिए एक बड़ा झटका था, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई। उन्होंने बताया कि हमला बेहद क्रूर था — आतंकियों ने लोगों से उनका नाम और धर्म पूछा, उन्हें कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया, और जो ऐसा नहीं कर पाए, उन्हें गोली मार दी गई। इस अमानवीय हमले में अधिकतर मृतक पर्यटक थे, जो छुट्टियाँ मनाने पहलगाम पहुंचे थे।
इस हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूहों का हाथ बताया जा रहा है।
इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में जबरदस्त तनाव उत्पन्न हो गया है। केंद्र सरकार ने इस आतंकी घटना को गंभीरता से लेते हुए कई कड़े कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में 7 मई को देशभर के 244 स्थानों पर मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है, ताकि आतंकी हमलों से निपटने की तैयारियों का परीक्षण किया जा सके। इस कदम को सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी दोहराया कि उनकी पार्टी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सरकार के साथ है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर केंद्र सरकार पाकिस्तान के खिलाफ कोई ठोस और निर्णायक कदम उठाती है, तो कांग्रेस उसका पूरी तरह समर्थन करेगी। उन्होंने कहा, "देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, और इस मुद्दे पर हमें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा।"
अंत में खरगे ने मांग की कि सरकार को पहलगाम हमले के लिए जवाबदेह ठहराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि खुफिया एजेंसियों की असफलता को सरकार ने स्वीकार किया है, तो फिर इस हमले में हुई मौतों की जिम्मेदारी भी उसे लेनी चाहिए।





