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पी. चिदंबरम का आरोप: तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण यूपीए सरकार की मेहनत का नतीजा, मोदी सरकार का कोई योगदान नहीं

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने हाल ही में कहा कि मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा को भारत |

पी. चिदंबरम का आरोप: तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण यूपीए सरकार की मेहनत का नतीजा, मोदी सरकार का कोई योगदान नहीं
फोटो: पी. चिदंबरम का आरोप: तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण यूपीए सरकार की मेहनत का नतीजा, मोदी सरकार का कोई योगदान नहीं
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने हाल ही में कहा कि मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा को भारत लाने का श्रेय मोदी सरकार ले रही है, जबकि असल में यह कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की कड़ी मेहनत का परिणाम है। चिदंबरम ने गुरुवार को एक बयान में यह दावा किया कि 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य आरोपी राणा को भारत लाया गया, लेकिन मोदी सरकार इस घटनाक्रम का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, जबकि सच्चाई इससे बहुत अलग है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह प्रत्यर्पण एक दशक से भी अधिक समय तक चली कठिन, परिश्रमी और रणनीतिक कूटनीति का परिणाम है, जो यूपीए सरकार ने अमेरिका के साथ समन्वय करके सुनिश्चित की थी। चिदंबरम ने कहा, “मोदी सरकार का इस प्रक्रिया में कोई योगदान नहीं है, जबकि यह पूरी प्रक्रिया यूपीए सरकार के समय की गई कड़ी मेहनत और अंतरराष्ट्रीय समन्वय का परिणाम है। इसका श्रेय लेने की कोशिश केवल राजनीतिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस के नेतृत्व में की गई कोशिशों की बदौलत राणा को अंततः भारत लाने में सफलता मिली, और यही असली श्रेय कांग्रेस को जाता है। उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि यूपीए सरकार की ईमानदार कोशिशों के कारण ही हम सबसे खतरनाक अपराधियों में से एक को कानून के कटघरे में खड़ा कर पाए हैं।

कांग्रेस ने इस पूरे मामले में भाजपा पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25 फरवरी को एक प्रेस कांफ्रेंस में इस मुद्दे का श्रेय लेने की कोशिश की, लेकिन इस सफलता का असली श्रेय यूपीए सरकार की कड़ी मेहनत को जाता है, ना कि मोदी सरकार को। कांग्रेस ने यह भी कहा कि इस मामले में मोदी सरकार द्वारा श्रेय लेने का प्रयास केवल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है, जबकि इस पूरे कूटनीतिक प्रयास में यूपीए सरकार का प्रमुख योगदान रहा है। वहीं, भाजपा ने कांग्रेस पर आतंकवाद के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब करने के बजाय आत्मरक्षा के लिए आरोप लगाए थे। 

पूनावाला ने यह भी आरोप लगाया कि 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस ने 26/11 हमलों के दोषियों को दोषी ठहराने की बजाय भारतीय एजेंसियों और नागरिकों पर आरोप मढ़े थे। उन्होंने आगे कहा, "कांग्रेस ने 26/11 के हमले के बाद आतंकवादियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, बल्कि आतंकवादियों को 'वाइटवॉश' करने की कोशिश की और आतंकवादियों को 'क्लीन चिट' देने का काम किया। इसके बजाय, कांग्रेस उन आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने में रुचि नहीं रखती थी।" इसके साथ ही भाजपा प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने आतंकी हमलों के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों पर लगातार हमला किया और इसके साथ ही आरएसएस और संघ के खिलाफ झूठी और बेबुनियाद कहानियां गढ़ने में लगे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने एक विवादास्पद बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र एटीएस के पूर्व सदस्य हेमंत करकरे की हत्या 26/11 के आतंकवादी अजमल कसाब ने नहीं, बल्कि एक पुलिसकर्मी ने की थी। 

पूनावाला ने आरोप लगाया कि जब राणा का प्रत्यर्पण हुआ, कांग्रेस ने उसे भारत की जीत के रूप में स्वीकारने की बजाय, इस मुद्दे पर वोट बैंक की राजनीति करने में लगी हुई है। उन्होंने कहा, “इस ऐतिहासिक घटनाक्रम को एक राजनीतिक मुद्दा बनाना कांग्रेस की आदत बन गई है, जो केवल सत्ता में बने रहने के लिए देश के खिलाफ काम करती है।” इसके अलावा, पूनावाला ने यह भी कहा कि मुंबई हमलों के बाद भारत के सुरक्षा बलों को आतंकवादी शिविरों पर हमला करने से रोक दिया गया था क्योंकि इस कार्रवाई से कुछ राजनीतिक लाभ हो सकता था। उन्होंने यह दावा किया कि पूर्व वायु सेना प्रमुख फली होमी मेजर ने कहा था कि आतंकवादी शिविरों पर हमला करने से भारतीय रक्षा और सुरक्षा बलों को रोक दिया गया था, और यह बात पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं द्वारा लिखी गई किताबों में भी पाई जाती है।

 भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि 2009 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए शर्म अल-शेख समझौते ने भारत को आतंकवाद फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया। पूनावाला ने कहा, "जब मोदी सरकार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों का पर्दाफाश करने का काम करती है, तो पिछली सरकार ने भारत के खिलाफ अन्य देशों के रुख को मजबूती देने के लिए कई घोषणापत्रों पर हस्ताक्षर किए।" भा.ज.पा. ने कांग्रेस से मांग की है कि वह 26/11 के हमले को “आरएसएस की साजिश” बताने और भारतीय एजेंसियों को दोषी ठहराने के लिए माफी मांगे। भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने आतंकवाद के खिलाफ एक नरम रुख अपनाया और इस मुद्दे पर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया।

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