हरियाणा में मुख्यमंत्री रहते हुए भी मनोहर लाल खट्टर और उनके ही सरकार में गृह और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के बीच तनातनी की खबरें अक्सर आती रहती थीं। दोनों नेताओं के बीच मतभेद और तकरार की स्थिति पहले भी सामने आ चुकी है। खासकर, जब खट्टर के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत हुई, तो दोनों के बीच दरारें साफ तौर पर दिखाई देने लगीं। पहले कार्यकाल के दौरान दोनों के बीच कोई गंभीर मतभेद नहीं थे, लेकिन दूसरे कार्यकाल की शुरुआत होते ही सत्ता के वितरण और अन्य मुद्दों पर मतभेद उभरने लगे। उदाहरण के तौर पर, साल 2021 में अनिल विज को शहरी स्थानीय निकायों के विभाग से हटा दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने खुद यह आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री खट्टर ने उनसे गृह विभाग की मांग की थी।
इसके बाद, विज ने यह भी कहा था कि उन्होंने सभी विभागों से इस्तीफा देने की बात की थी, लेकिन खट्टर ने उनसे गृह विभाग हटाने की प्रक्रिया जारी रखी थी।
इसके अलावा, खट्टर और विज के बीच खुफिया विभाग के नियंत्रण को लेकर भी विवाद हुआ था। विज ने इस मामले में खट्टर पर आरोप लगाया था कि उन्होंने इस विभाग को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश की। हालांकि, यह विभाग अंततः खट्टर के नियंत्रण में ही रहा। इसके अलावा, डीजीपी मनोज यादव के एक साल के एक्सटेंशन को लेकर भी खट्टर और विज आमने-सामने आ गए थे। विज ने कहा था कि राज्य सरकार को केंद्र की बजाय खुद ही यादव को एक्सटेंशन देना चाहिए था।
इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच तनाव बना था।
इसके बाद, जब बीजेपी ने नायब सिंह सैनी को हरियाणा का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया, तो अनिल विज इस फैसले से नाराज हो गए थे। उन्हें लगता था कि वे वरिष्ठता के हिसाब से मुख्यमंत्री बनने के हकदार थे, लेकिन पार्टी ने ओबीसी समुदाय से आने वाले नायब सिंह सैनी के नाम पर मुहर लगा दी। इस फैसले से विज खफा हो गए और नायब सिंह सैनी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए। इसके बाद, विज विधायक दल की बैठक से बाहर निकल गए थे, और यह संकेत था कि उन्हें पार्टी के इस निर्णय से बहुत नाराजगी थी।
हालांकि, अब बीजेपी की सरकार बनने के बाद अनिल विज को ऊर्जा और परिवहन मंत्री का पद सौंपा गया है।
इसके बाद, उन्होंने परिवहन विभाग में खट्टर के पुराने फैसले को पलटने की कोशिश की है। खट्टर के मुख्यमंत्री रहते हुए, परिवहन विभाग में गैर एचसीएस आरटीए के पदों पर पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया था, लेकिन विज ने अपने मंत्री बनने के बाद इन अधिकारियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब विभाग में पहले की तरह विभागीय कर्मियों की तैनाती की जाएगी, और आरटीए के पदों पर एचसीएस अफसरों को तैनात करने की सिफारिश की गई है। इस तरह, अनिल विज ने खट्टर के निर्णयों को पलटते हुए अपने विभाग में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
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