गुप्ता ने यह भी कहा कि कई मामलों में उन्हें यह जानकारी मिली है कि संबंधित अधिकारियों ने विधानसभा के माननीय सदस्यों से सीधे संपर्क करने के प्रयासों को न केवल नजरअंदाज किया, बल्कि उनका कोई उचित जवाब भी नहीं दिया।
स्पीकर ने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर उनका आस्थिर होना स्वाभाविक है क्योंकि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया और विधायिका की कार्यप्रणाली से संबंधित है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह पत्र दिल्ली विधानसभा के माननीय सदस्यों के साथ सरकारी अधिकारियों के व्यवहार की प्रक्रिया और मानदंडों के संदर्भ में है, और यह सभी अधिकारियों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वे विधानसभा के सदस्यों के साथ समुचित और सम्मानजनक तरीके से पेश आएं।
विजेंद्र गुप्ता ने आगे कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें लगता है कि समय आ गया है जब दिल्ली सरकार के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभाग प्रमुखों, दिल्ली पुलिस और डीडीए जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को इस विषय पर पूरी तरह से अवगत कराया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वे इन निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस विषय में तत्काल कार्रवाई करने की अपेक्षा की और साथ ही यह भी आग्रह किया कि इस पर की गई कार्रवाई की जानकारी शीघ्र उन्हें दी जाए।
स्पीकर का यह कदम विधानसभा के कार्यकुशलता और सदस्यो के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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