वक्फ कानून के विरोध को लेकर उठने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर ओवैसी ने सफाई दी कि यह मुद्दा भारत के मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है।
उन्होंने कहा,
"जब हमारे हक और संविधान के खिलाफ कोई भी सरकार आवाज़ उठाएगी, तो हम उसका विरोध करेंगे। लेकिन जब बात देश की अखंडता और एकता की होगी, तो हम सब एक साथ खड़े हैं – ना मोदी के लिए, ना शाह के लिए, बल्कि इस मुल्क के लिए।"
उन्होंने यह भी कहा कि आज़ादी की पहली लड़ाई में सबसे पहले जान देने वाले उलेमा-ए-इकराम थे, और आज भी वही समुदाय संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठा रहा है।
ओवैसी ने वर्तमान वक्फ संशोधन अधिनियम को "संवैधानिक रूप से दोषपूर्ण" बताते हुए कहा कि यह कानून वक्फ संपत्तियों को नष्ट करने की मंशा से लाया गया है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद जताई।
एक इंटरव्यू में उन्होंने पूछा,
"जब हर समुदाय और विषय के लिए अलग कानून मौजूद हैं, तो ‘समान नागरिक संहिता’ कैसे समान हो सकती है?"
उन्होंने इसे विरोधाभासी करार दिया।
ओवैसी ने केंद्र सरकार और अधिनियम के समर्थकों को चुनौती दी कि वे यह स्पष्ट करें कि इस कानून में ऐसा कौन सा प्रावधान है जो वक्फ संपत्तियों की रक्षा करता है या उसकी आय बढ़ाता है।
उन्होंने कहा, "आपने पुराने कानून से बेहतर धाराएं हटा दीं। मुझे एक ऐसी धारा बताइए जो अतिक्रमण हटाने में मदद करती हो, या जिससे वक्फ की आमदनी बढ़े। न सरकार और न ही उनके समर्थक इसका जवाब दे पाएंगे।"





