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चीन की LAC पर नई मिलिट्री ड्रिल, क्या ड्रैगन की योजनाओं में बढ़ रहा है खतरा?

चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास (कॉम्बैट ड्रिल) शुरू कर दिया है। ड्रिल में वाहनों, मानवरहित प्रणाली (यूएवी), ड्रोन, |

चीन की LAC पर नई मिलिट्री ड्रिल, क्या ड्रैगन की योजनाओं में बढ़ रहा है खतरा?
फोटो: China's LAC, military drill
जब एक ओर देश सेना दिवस की तैयारियों में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास (कॉम्बैट ड्रिल) शुरू कर दिया है। यह युद्धाभ्यास पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के शिनजियांग मिलिट्री कमांड की रेजिमेंट द्वारा किया गया, और इसमें चीन की सेना ने उन्नत तकनीकी उपकरणों का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया। इस ड्रिल में वाहनों, मानवरहित प्रणाली (यूएवी), ड्रोन, और अन्य सैन्य संसाधनों का समावेश किया गया, जो चीन की सैन्य ताकत को प्रदर्शित करता है।

भारत-चीन के रिश्तों में अनिश्चितता बनी हुई है


यह ड्रिल तब शुरू की गई है जब भारत और चीन शांति बनाए रखने की दिशा में काम कर रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ था, लेकिन अभी भी दोनों देशों के रिश्तों में अनिश्चितता बरकरार है। सीमा पर सैनिकों की बड़ी संख्या में तैनाती के बावजूद शांति कायम करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन ये ड्रिल यह संकेत देती हैं कि चीन अपने सैन्य संचालन को और मजबूत करने में जुटा है।

चीन का रणनीतिक कदम


चीन की यह सैन्य ड्रिल केवल एक सामान्य प्रशिक्षण का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक रणनीतिक कदम प्रतीत होती है। चीन विवादित क्षेत्रों में तेजी से अपनी सेना की तैनाती कर रहा है, ताकि वह इन क्षेत्रों में सैन्य सक्रियता बढ़ा सके। खासतौर पर, चीन ने उच्च-altitude क्षेत्रों में सैनिकों के लिए एक्सोस्केलेटन का उपयोग किया है, जिससे वे इन इलाकों में बेहतर प्रदर्शन कर पा रहे हैं। इसका मतलब है कि चीन अपने सैन्य अभ्यास को और अधिक प्रभावी बना रहा है और भारतीय सीमा के पास अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत कर रहा है।

भारत को सैन्य तैयारी में और मजबूती लाने की आवश्यकता


भारत को अब और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। चीन की लगातार सैन्य गतिविधियों को देखते हुए भारत को अपनी सैन्य तैयारियों को गति देने की आवश्यकता है। खासकर, लद्दाख में सैन्य आधुनिकीकरण के प्रयासों को तेज करना जरूरी है। भारतीय सेना शीतकालीन युद्धाभ्यास कर रही है, बुनियादी ढांचे को उन्नत किया जा रहा है, और चीन के संभावित हमलों से निपटने के लिए सर्विलांस सिस्टम को और भी मजबूत किया जा रहा है।

गश्ती की बहाली और सीमा पर शांति की संभावना


दूसरी ओर, देपसांग और डेमचोक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में गश्ती फिर से शुरू होने को दोनों देशों के बीच संबंधों में नरमी का संकेत माना जा सकता है। हालांकि, चीन की ओर से जारी सैन्य अभ्यास इस बात को स्पष्ट करते हैं कि स्थायी शांति के रास्ते में अभी भी कई चुनौतियां हैं। दोनों देशों के बीच सीमा पर स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन चीन की सैन्य गतिविधियों से यह लगता है कि शांति की स्थिति अभी दूर है।

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