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मुंबई कांग्रेस का संकट गहराया—नेताओं की नाराजगी और बिजली कटौती बनी मुसीबत!

सूत्रों के मुताबिक, मुंबई कांग्रेस दफ्तर पर करीब 4 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया था। इसे समय पर नहीं चुकाने के कारण बीते हफ्ते बिजली विभाग ने |

मुंबई कांग्रेस का संकट गहराया—नेताओं की नाराजगी और बिजली कटौती बनी मुसीबत!
फोटो: Mumbai Congress crisis
महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल के बीच मुंबई कांग्रेस एक नए विवाद में घिर गई है। पार्टी कार्यालय का बिजली कनेक्शन काटे जाने की खबरों के बाद अब कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ रही है। दावा किया जा रहा है कि मुंबई कांग्रेस का लाखों रुपये का बिजली बिल बकाया था, जिसके चलते बिजली विभाग ने कनेक्शन काट दिया। इस बीच, पार्टी के भीतर अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

4 लाख से ज्यादा का बकाया, कट गया बिजली कनेक्शन


सूत्रों के मुताबिक, मुंबई कांग्रेस दफ्तर पर करीब 4 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया था। इसे समय पर नहीं चुकाने के कारण बीते हफ्ते बिजली विभाग ने कनेक्शन काट दिया। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने तुरंत हस्तक्षेप किया और बकाया राशि का एक बड़ा हिस्सा चुकाकर बिजली सेवा बहाल करवाई। बिजली बिल ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की तनख्वाह में भी देरी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों को एक से दो महीने तक सैलरी नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं, मुंबई कांग्रेस का दफ्तर PWD विभाग के अधीन आता है, और बताया जा रहा है कि पार्टी द्वारा किराया भी समय पर नहीं चुकाया जा रहा है।

मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ पर आरोप


मुंबई कांग्रेस के अंदर एक गुट ने अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। पार्टी के अंदर उनके नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। गायकवाड़ ने 18 महीने पहले जब मुंबई कांग्रेस की कमान संभाली थी, तब उन्होंने संगठन को मजबूत करने का वादा किया था, लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि उनका प्रबंधन कमजोर पड़ रहा है और पार्टी बिखर रही है।

शिंदे गुट के नेता और कांग्रेस के पूर्व मुंबई अध्यक्ष संजय निरुपम ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने X (ट्विटर) हैंडल पर लिखा— "मुंबई कांग्रेस के दफ्तर पर बस ताला लगना बाकी है। दफ्तर का किराया वर्षों से नहीं भरा गया है। बकाया 18 लाख हो गया है। बिजली बिल का बकाया 5 लाख हो गया है, जिसके कारण बिजली कट गई थी।" उन्होंने कहा कि जब वे अध्यक्ष थे, तब कभी ऐसी स्थिति नहीं आई। पार्टी को चलाने के लिए हर महीने 14 लाख रुपये की जरूरत होती थी, जिसमें ऑफिस का किराया, बिजली बिल और कर्मचारियों का वेतन शामिल था।

मुंबई कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। पार्टी के कोषाध्यक्ष संदीप शुक्ला ने कहा— "सभी आरोप झूठे हैं। कर्मचारियों की सैलरी नियमित रूप से दी जाती है। बिजली बिल और किराया भी समय-समय पर चुकाया जाता है। विपक्षी दल इस मामले को बेवजह तूल दे रहे हैं।" वहीं, कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने संजय निरुपम पर पलटवार करते हुए कहा कि वे पहले अपनी पार्टी की हालत देखें। उन्होंने कहा— "मुंबई कांग्रेस वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व में सही तरीके से काम कर रही है और पार्टी मजबूत बनी हुई है।"

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