संघ की विचारधारा में जाति, पंथ या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता।" भागवत ने यह भी कहा कि संघ की शाखा में सभी का स्वागत है, लेकिन जिन लोगों का नज़रिया और सोच खुद को औरंगजेब का वंशज मानने का है, उनके लिए शाखा में आना संभव नहीं है।
संघ प्रमुख ने आगे बताया, "हमारी संस्कृति एक ही है। हम अलग-अलग जातियों, पंथों और धर्मों के होते हुए भी एक ही राष्ट्र की संतान हैं।" उनका कहना था कि संघ की शाखा में कोई भी व्यक्ति आ सकता है, बशर्ते वह भारत माता की जय बोलता हो और भारतीयता का सम्मान करता हो। उन्होंने यह भी जोड़ते हुए कहा कि आरएसएस का उद्देश्य राष्ट्रहित में काम करना है, और इसके लिए विचारधारा में सभी लोगों को समान रूप से स्थान दिया जाता है, भले ही उनकी पूजा पद्धति या अन्य सांस्कृतिक आस्थाएं अलग-अलग हों।
Read This Also:- रामनवमी जुलूस पर बवाल, महाराष्ट्र में अंडे फेंके गए, कोलकाता में पथराव; भाजपा ने लगाया आरोप
Read This Also:- रामनवमी जुलूस पर बवाल, महाराष्ट्र में अंडे फेंके गए, कोलकाता में पथराव; भाजपा ने लगाया आरोप





