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मिल्कीपुर उपचुनाव: सपा, भाजपा के बाद अब चंद्रशेखर आजाद ने भी उतारा उम्मीदवार, अखिलेश को हो सकता है नुक़सान

अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर उपचुनाव अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका |

मिल्कीपुर उपचुनाव: सपा, भाजपा के बाद अब चंद्रशेखर आजाद ने भी उतारा उम्मीदवार, अखिलेश को हो सकता है नुक़सान
फोटो: SP, BJP, Chandrashekhar Azad, Akhilesh
अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर उपचुनाव अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। यह सीट सपा के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह उनके गढ़ के रूप में मानी जाती थी, लेकिन अब इस सीट को लेकर राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। दरअसल, इस उपचुनाव में सपा के सामने अब कई तरह की चुनौतियां उत्पन्न हो गई हैं, खासकर भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद द्वारा प्रत्याशी उतारने के बाद। चंद्रशेखर आजाद ने मिल्कीपुर से सूरज चौधरी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, जो कुछ समय पहले तक समाजवादी पार्टी के सदस्य थे। 

सूरज चौधरी को टिकट देने की उम्मीद थी, लेकिन जब अखिलेश यादव ने अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को उम्मीदवार बना दिया, तो सूरज चौधरी ने बगावत करते हुए चंद्रशेखर आजाद की आजाद पार्टी का दामन थाम लिया। सूरज ने हाल ही में इस क्षेत्र में एक बड़ा सम्मेलन भी आयोजित किया था, जो सपा के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। मिल्कीपुर सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है, क्योंकि सपा के विधायक अवधेश प्रसाद अयोध्या से सांसद बन गए हैं, जिसके बाद इस सीट पर उपचुनाव की आवश्यकता पड़ी। सपा ने पहले ही अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को उम्मीदवार घोषित कर दिया था, और वह लगातार इस सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे थे। लेकिन, अब भाजपा ने चंद्रभानू को टिकट देकर जातिगत समीकरणों में सेंध लगाने की कोशिश की है, खासकर पासी समुदाय के वोटों को प्रभावित करने के लिए। चंद्रभानू का टिकट सपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, क्योंकि यह समुदाय परंपरागत रूप से सपा के पक्ष में वोट करता आया है।

चंद्रशेखर आजाद के समर्थन और सूरज चौधरी के सपा से बगावत कर आजाद पार्टी में शामिल होने से सपा के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। अब, इस सीट पर मुकाबला केवल भाजपा और सपा के बीच नहीं रहेगा, बल्कि चंद्रशेखर आजाद की आजाद पार्टी भी अहम भूमिका निभा सकती है। इससे यह उपचुनाव और भी दिलचस्प हो गया है। मिल्कीपुर उपचुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 17 जनवरी है। मतदान 5 फरवरी को होगा और परिणाम 8 फरवरी को घोषित किए जाएंगे। इस उपचुनाव का परिणाम सिर्फ मिल्कीपुर सीट के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं होगा, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों के लिए संदेश भी देगा कि उनका जनाधार कितना मजबूत है।

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