मायावती ने अपने इस फैसले के पीछे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आकाश का भविष्य उनकी पत्नी के व्यवहार पर निर्भर करेगा। बसपा सुप्रीमो ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, "चूंकि आकाश आनंद की शादी अशोक सिद्धार्थ की बेटी से हुई है, ऐसे में सिद्धार्थ को पार्टी से निकालने के बाद यह देखना जरूरी है कि उस लड़की का अपने पिता पर कितना प्रभाव है और वह आकाश को कितना प्रभावित करती है। अब तक इसका प्रभाव सकारात्मक नहीं दिख रहा है।"
मायावती ने साफ किया कि उनके रहते कोई भी व्यक्ति पार्टी का उत्तराधिकारी नहीं बनेगा। उन्होंने बसपा संस्थापक कांशीराम का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी अपने रिश्तेदारों को विशेष महत्व नहीं दिया, बल्कि यह स्पष्ट किया था कि कोई भी कार्यकर्ता बनकर पार्टी के लिए काम कर सकता है। मायावती ने दोहराया कि वह भी इसी सिद्धांत का पालन कर रही हैं और इसी के तहत अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर करने का निर्णय लिया गया है।
अशोक सिद्धार्थ पर लगाया बसपा को कमजोर करने का आरोप
मायावती ने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी को दो गुटों में बांटने और कमजोर करने का प्रयास किया। उनके अनुसार, "अशोक सिद्धार्थ न सिर्फ बसपा को नुकसान पहुंचा रहे थे, बल्कि आकाश आनंद के राजनीतिक करियर को भी खराब कर रहे थे।" इसीलिए पार्टी ने सख्त कदम उठाते हुए आकाश को भी सभी पदों से हटा दिया है। मायावती ने बसपा के राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को भी पार्टी का नेशनल को-ऑर्डिनेटर नियुक्त किया है। इससे पहले मई 2024 में भी आकाश आनंद को पार्टी की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, लेकिन 45 दिनों बाद उन्हें फिर से बहाल कर मायावती ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। हालांकि, अब दोबारा लिए गए इस कड़े फैसले से साफ है कि बसपा में नेतृत्व को लेकर गहरे अंतर्विरोध चल रहे हैं।
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