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‘मनमोहन सिंह स्मारक बढ़िया विचार, लेकिन मेरे पिता के लिए कुछ नहीं’ – शर्मिष्ठा मुखर्जी

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब उनके पिता प्रणब मुखर्जी का निधन हुआ था, तो कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने शोक |

‘मनमोहन सिंह स्मारक बढ़िया विचार, लेकिन मेरे पिता के लिए कुछ नहीं’ – शर्मिष्ठा मुखर्जी
फोटो: Manmohan Singh, Sharmishtha Mukherjee
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के लिए दिल्ली में एक अलग स्मारक बनाने के प्रस्ताव की आलोचना के साथ ही इसे सही भी ठहराया। उन्होंने कहा कि यह एक अच्छा विचार है, लेकिन उन्होंने कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल भी उठाए।

प्रणब मुखर्जी के निधन पर CWC की शोकसभा क्यों नहीं?


शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब उनके पिता प्रणब मुखर्जी का निधन हुआ था, तो कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने शोक सभा बुलाने की भी जहमत नहीं उठाई। उन्होंने कांग्रेस आलाकमान पर उन्हें इस मुद्दे पर गुमराह करने का भी आरोप लगाया।   उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने उनसे कहा था कि यह परंपरा राष्ट्रपतियों के लिए नहीं है। इस तर्क को खारिज करते हुए उन्होंने अपनी पिता की डायरियों का हवाला दिया, जिसमें उल्लेख था कि पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन के निधन पर सीडब्ल्यूसी की बैठक हुई थी और शोक संदेश का मसौदा खुद प्रणब मुखर्जी ने तैयार किया था।

मनमोहन सिंह के लिए स्मारक का समर्थन


शर्मिष्ठा ने भाजपा नेता केसीआर केसवन की एक पोस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने कई वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की है, क्योंकि वे गांधी परिवार के सदस्य नहीं थे। उन्होंने कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह के लिए एक स्मारक एक शानदार विचार है। वे इसके पूरी तरह हकदार हैं। साथ ही, भारत रत्न भी, जिसे बाबा राष्ट्रपति रहते हुए उन्हें देना चाहते थे। लेकिन ऐसा दो कारणों से संभव नहीं हो सका।”

शर्मिष्ठा ने मनमोहन सिंह को दी अंतिम विदाई


पूर्व पीएम के निधन पर शर्मिष्ठा मुखर्जी ने संवेदनाएं व्यक्त करते हुए एक्स पर लिखा, “एक युग का अंत। डॉ. सिंह ने एक महान जीवन जिया। भारत की विकास गाथा में उनके योगदान को एक कृतज्ञ राष्ट्र हमेशा याद रखेगा। सबसे बढ़कर, वह एक सच्चे सज्जन और अच्छे इंसान थे, जैसा कि मेरे पिता अक्सर कहते थे। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।” शर्मिष्ठा ने आगे लिखा, “1970 से पांच दशकों तक चले कार्य संबंधों के चलते डॉ. सिंह और मेरे बीच एक मजबूत समझ विकसित हुई थी। मेरा मानना है कि हम एक-दूसरे को काफी अच्छी तरह से समझते थे।” इस बयान से जहां उन्होंने मनमोहन सिंह के प्रति सम्मान व्यक्त किया, वहीं कांग्रेस पार्टी के आंतरिक मामलों और वरिष्ठ नेताओं के प्रति रवैये पर सवाल खड़े किए।

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