मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा के बाद एक प्रोटोकॉल तैयार किया गया है, जिसे सभी संबंधित विभागों को अपनाना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि अगर वह किसी गलत खबर या घटना की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए तत्काल प्रतिक्रिया देती है, तो इससे जनता के बीच सरकार की छवि को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, परिपत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अब तक राज्य सरकार के विभिन्न विभाग इस प्रकार की भ्रामक खबरों पर तत्काल प्रतिक्रिया देने में सुस्त रहे हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रिंट मीडिया में प्रकाशित किसी भी भ्रामक या गलत समाचार पर अधिकतम 12 घंटे के भीतर और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित खबरों पर दो घंटे के भीतर स्पष्टीकरण जारी किया जाना चाहिए। इसके लिए संबंधित विभागों को मीडिया हाउस से संपर्क करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। इस प्रक्रिया में सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय (DGIPR) की मीडिया प्रतिक्रिया इकाई विशेष भूमिका निभाएगी। यह इकाई संबंधित विभागों को भ्रामक खबरों की जानकारी देगी, ताकि वे तुरंत आवश्यक स्पष्टीकरण जारी कर सकें।
सरकार ने 2 फरवरी, 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया था और सभी मंत्रिस्तरीय विभागों के लिए एक विस्तृत सूचनात्मक प्रारूप तैयार करने की योजना बनाई थी। इस प्रारूप का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य सरकार के कामकाज और नीतियों को लेकर मीडिया में प्रकाशित होने वाली खबरों पर त्वरित और तथ्यात्मक प्रतिक्रिया दी जा सके। परिपत्र में यह भी कहा गया है कि सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय विभिन्न विभागों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर तथ्यों को संकलित करेगा और उन्हें संबंधित मीडिया संस्थानों तक पहुंचाएगा, ताकि सही जानकारी जनता तक जल्द से जल्द पहुंच सके।
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