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केजरीवाल की हार पर 'अभिमन्यु' वाली तुलना: सौरभ भारद्वाज बोले- 'छल से घेरा गया, पर वापसी दोगुनी होगी'

विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) की हार को करीब डेढ़ महीने बीत चुके हैं, और इसके बाद पहली बार पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल दिल्ली में किसी |

केजरीवाल की हार पर 'अभिमन्यु' वाली तुलना: सौरभ भारद्वाज बोले- 'छल से घेरा गया, पर वापसी दोगुनी होगी'
फोटो: केजरीवाल की हार पर 'अभिमन्यु' वाली तुलना: सौरभ भारद्वाज बोले- 'छल से घेरा गया, पर वापसी दोगुनी होगी'
विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) की हार को करीब डेढ़ महीने बीत चुके हैं, और इसके बाद पहली बार पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल दिल्ली में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए। यह आयोजन पार्टी मुख्यालय में 'एक शाम शहीदों के नाम' के नाम से हुआ, जहां दिल्ली के नए प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मंच से नई दिल्ली विधानसभा सीट के चुनाव परिणामों का जिक्र छेड़ा। इसी सीट पर केजरीवाल को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता प्रवेश वर्मा ने शिकस्त दी थी, जो अब दिल्ली सरकार में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री के तौर पर कार्यरत हैं। सौरभ भारद्वाज ने इस हार को महाभारत के एक प्रसिद्ध प्रसंग से जोड़ते हुए कहा, 'जिस तरह से नई दिल्ली सीट पर अरविंद केजरीवाल का चुनाव हुआ, उसे सुनकर ऐसा लगता है जैसे महाभारत में चक्रव्यूह के बीच अभिमन्यु को घेरकर छल और कपट के साथ उसका वध किया गया था। ठीक उसी तरह हमारे केजरीवाल जी को नई दिल्ली में हराने के लिए घेराबंदी की गई।

 यह बात न सिर्फ हमने, बल्कि पूरे दिल्ली ने देखी, और शायद पूरी दुनिया ने भी इसकी गवाही दी।' इसके बाद हल्की मुस्कान के साथ भारद्वाज ने कहा कि केजरीवाल की किस्मत का खेल तो ऐसा ही है—वह कभी जमीन पर आते हैं, तो कभी आसमान छूते हैं। उन्होंने आगे कहा, 'हम सभी की किस्मत इनके साथ एक डोर से बंधी है। आपने गौर किया होगा कि जब कोई बॉल को जितनी जोर से नीचे पटकता है, वह उतनी ही तेजी से ऊपर उछलती है। मेरा अनुभव कहता है कि अरविंद जी जब भी नीचे गए हैं, हर बार दोगुनी रफ्तार और ताकत के साथ ऊपर उठे हैं। पूरी पार्टी का भविष्य, हर एक कार्यकर्ता का सपना, सब कुछ इनकी किस्मत के साथ जुड़ा हुआ है। हमें किसी ज्योतिषी के पास जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती—बस इनकी कुंडली देख लो, सब पता चल जाता है। वैसे, मेरी पत्नी ने एक बार ज्योतिषी से पूछा था, तो उसने कहा कि आपकी पार्टी के हर सदस्य की किस्मत एक जैसी चल रही है—जो इनका भाग्य, वही सबका भाग्य।'

 सौरभ भारद्वाज, जो पहले दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं, ने यह भी कहा कि जब 'आप' की सरकार सत्ता में थी, तो दिल्ली की गलियों में, लोगों के चेहरों पर एक अलग ही रौनक और खुशी नजर आती थी। लेकिन अब, जब से भाजपा की सरकार आई है, वह खुशहाली और उत्साह कहीं गायब-सा हो गया है। उन्होंने बताया कि हारे हुए 'आप' विधायक जब अपने इलाकों में जाते हैं, तो लोग उन्हें देखते ही रोक लेते हैं, गले लगाते हैं, और आंसुओं के साथ कहते हैं, 'आप कैसे हार गए? हमने तो आपको वोट दिया था।' भारद्वाज ने इसे पार्टी की नैतिक जीत करार देते हुए कहा, 'यह हमारा सबसे बड़ा विजय है कि आज हमारी हार की चर्चा उनकी जीत से कहीं ज्यादा हो रही है। सोचिए, पुलिस बल का दुरुपयोग, चुनाव आयोग पर दबाव, धन-बल का खुला खेल, प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल, और यहाँ तक कि गुंडागर्दी तक—सब कुछ आजमाने के बाद भी, अगर हम यह मान लें कि चुनाव के नतीजे पूरी तरह सही हैं, तो फिर भी 'आप' और भाजपा के वोट शेयर में महज दो फीसदी का अंतर है। दस साल तक सरकार चलाने वाली पार्टी, हर संभव हथकंडा अपनाने के बाद भी अगर सिर्फ 2 फीसदी से आगे निकल पाई, तो यह अपने आप में हमारी ताकत और जनता के भरोसे को दर्शाता है।'

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