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किरन रंगी बीजेपी के रंग, क्या ये कांग्रेस को झटका है?

आँकड़ों और हरियाणा की राजनीति पर गौर करें तो किरण चौधरी का जाना कांग्रेस को झटके जैसा नहीं है। कुछ बड़े सवालों का जवाब खोजा जाए तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। - क्या प्रदेश कांग्रेस में हुडा का वर्चस्व है? क्या लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों में कांग्रेस की

किरन रंगी बीजेपी के रंग, क्या ये कांग्रेस को झटका है?
फोटो: किरन रंगी बीजेपी के रंग, क्या ये कांग्रेस को झटका है?

 हरियाणा में कांग्रेस की बड़ी नेता किरण चौधरी ने कांग्रेस को छोड़कर भाजपा का दामन पकड़ लिया है। हरियाणा की राजनीति के लिहाज़ से ये एक बड़ी घटना है। कुछ लोग इसे कांग्रेस को झटका के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन आँकड़ों और हरियाणा की राजनीति पर गौर करें तो किरण चौधरी का जाना कांग्रेस को झटके जैसा नहीं है। कुछ बड़े सवालों का जवाब खोजा जाए तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। - 

  1. क्या प्रदेश कांग्रेस में हुडा का वर्चस्व है?
  2. क्या लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों में कांग्रेस की सफलता का श्रेय हुडा को जाता है?
  3. क्या बीते कुछ सालों में किरण चौधरी कोई महत्वपूर्ण भूमिका निभा पाईं हैं?

प्रदेश कांग्रेस में हुडा का वर्चस्व
हरियाणा कांग्रेस में हुडा का वर्चस्व जानने के लिए 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों और इस बीच हुए राजनीतिक विकास को देखना होगा। 2019 के लोकसभा चुनावों के समय अशोक तंवर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे। तंवर 2014 से ये ज़िम्मेदारी सँभाल रहे थे। हुडा और तंवर के बीच संबंध ठीक नहीं थे। दोनों के समर्थकों द्वारा एक-दूसरे के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की ख़बरें भी सामने आईं थीं। लेकिन अशोक तंवर को राहुल गाँधी का करीबी बताया जाता है। हुडा के साथ तमाम मतभेद के बावजूद अशोक तंवर अध्यक्ष बने रहे। लोकसभा के चुनाव हुए और हरियाणा में कांग्रेस शून्य पर सिमट गई। इसके बाद हरियाणा कांग्रेस बिखरी नज़र आने लगी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा पार्टी ने रोहतक में एक रैली की। इसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पुरानी पार्टी जैसी नहीं है। भूपेंद्र के सुर बाग़ी थे। लेकिन 13 विधायकों का समर्थन और भारी भीड़ ने साबित कर दिया था कि हुडा हरियाणा के सबसे बड़े मास पुलर नेता हैं।Hooda revolted against congress in Rohtak

इस रैली के बाद अशोक तंवर को अध्यक्ष पद से हटाया गया। भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुनाव प्रबंधन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया। और जातीय समीकरणों को देखते हुए कुमारी शैलजा को प्रदेशाध्यक्ष की ज़िम्मेदारी दी गई। इसके बाद विधानसभा चुनाव हुए और कांग्रेस ने 31 सीटें हासिल की। कांग्रेस का ये प्रदर्शन सीधी तौर पर हुड्डा से जोड़कर देखी गई। 
congress voteshare comparison

 


Haryana assembly election results 2014 vs 2019

 



हुडा की मर्ज़ी के हिसाब से पार्टी ने फ़ैसले लिए, चुनावों में बेहतर परिणाम आए लेकिन प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी के बिना हुडा का वर्चस्व अधूरा था। गुटबाज़ी और खुलकर होने लगी। स्थिति इतनी बिगड़ी कि मार्च 2022 में राहुल गाँधी सूरजेवाला, शैलजा, किरण चौधरी, कुलदीप बिश्नोई और हुडा से मिले और कहा कि एकता बनाए रखो। लेकिन एकता बनी नहीं। शैलजा को अध्यक्ष पद से हटना पड़ा। और अध्यक्ष बने उदयभान। उदयभान हुड्डा के करीबी माने जाते हैं। उदयभान का प्रदेशाध्यक्ष बनना प्रदेश में हुड्डा के वर्चस्व की स्थापना जैसा था। इसके बाद लोकसभा चुनाव हुए और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन शानदार रहा। कांग्रेस ने लोकसभा की 10 में से 5 सीटें जीतीं।