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क्या दिल्ली में ‘पर्ची CM’ का दौर? रेखा गुप्ता के पति को लेकर AAP-BJP में जुबानी जंग

भारद्वाज ने कहा, मुख्यमंत्री की शपथ रेखा गुप्ता ने ली है, उनके पति ने नहीं। यह दिल्ली है, कोई ‘फुलेरा की पंचायत’ नहीं जहां इस तरह की व्यवस्था को स्वीकार |

क्या दिल्ली में ‘पर्ची CM’ का दौर? रेखा गुप्ता के पति को लेकर AAP-BJP में जुबानी जंग
फोटो: क्या दिल्ली में ‘पर्ची CM’ का दौर? रेखा गुप्ता के पति को लेकर AAP-BJP में जुबानी जंग
दिल्ली की राजनीति इन दिनों एक नई हलचल से गुज़र रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के पति मनीष गुप्ता द्वारा सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकें लेने को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) आमने-सामने आ गए हैं। AAP के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने इस मुद्दे पर तीखा हमला बोलते हुए रेखा गुप्ता को "रबर स्टांप मुख्यमंत्री" बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की वास्तविक बागडोर रेखा गुप्ता के हाथों में नहीं, बल्कि उनके पति मनीष गुप्ता के पास है। भारद्वाज ने कहा, "मुख्यमंत्री की शपथ रेखा गुप्ता ने ली है, उनके पति ने नहीं। यह दिल्ली है, कोई ‘फुलेरा की पंचायत’ नहीं, जहां इस तरह की व्यवस्था को स्वीकार किया जाए।"

बीजेपी का पलटवार


AAP के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी पर पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या यह सच नहीं कि केजरीवाल सरकार में अधिकारियों को उनकी पत्नी को ‘मैडम सीएम’ कहने के निर्देश दिए गए थे?" सचदेवा ने आगे कहा कि आतिशी और सौरभ भारद्वाज के बीच पार्टी पर नियंत्रण को लेकर अंदरूनी प्रतिस्पर्धा चल रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के कार्यकाल में भूपेंद्र चौबे मुख्यमंत्री कार्यालय में किस हैसियत से लगातार दिखाई देते थे?

यह विवाद अब दिल्ली से निकलकर पंजाब तक जा पहुंचा है। बीजेपी ने सवाल खड़े करते हुए पूछा कि जब मनीष सिसोदिया का पंजाब सरकार में कोई आधिकारिक पद नहीं है, तो वह वहां उद्घाटन समारोहों में भाग किस अधिकार से ले रहे हैं? बीजेपी ने आम आदमी पार्टी से जवाब देने को कहा है कि क्या यही वह पारदर्शिता है, जिसका दावा पार्टी लगातार करती आई है?

विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने एक तस्वीर साझा की, जिसमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के पति मनीष गुप्ता को MCD, DJB, PWD और DUSIB जैसे प्रमुख विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक करते देखा गया। आतिशी ने इसे "संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन" करार दिया और कहा कि यह देश में शायद पहला मामला है जहां एक निर्वाचित महिला मुख्यमंत्री के स्थान पर उनके पति प्रशासन चला रहे हैं।

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